WOMEN EMPOWERMENT- LAXMI AGARWAL

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दोस्तों आज का आर्टिकल समर्पित है LAXMI AGGARWAL के लिए जिनके ऊपर ACID ATTACK किया गया और उन्हें और उनके सपनों को कुचलने की एक बहुत ही निंदनीय कोशिश की परंतु उन्होंने खुद को उस अटैक से उभारा और मजबूती से दुनिया का सामना किया तथा एक मिसाल बनी ।

दोस्तों लक्ष्मी अग्रवाल के बारे में जानने से पहले हमें यह जानना बहुत जरूरी है कि यह उनके साथ क्यों हुआ आखिर क्यों एक इंसान कितना गिर गया कि वह ACID ATTACK जैसा अपराध कर, आखिर क्यों एक इंसान कितना गिर जाता है जो वह ACID ATTACK जैसे घिनौने अपराध कर देता है करता है ।

REASONS OF WOMAN EXPLOITATION

#HISTORY

सदियों से एक प्रथा चली आई है कि एक महिला केवल घर का काम करने तक ही सीमित होती है, और जो पुरुष है वह बाहर जाकर काम करता है और अपने सपने को पूरा करता है।  असल में देखा जाए तो यह कोई प्रथा नहीं यह एक कुप्रथा है यह लोगों की मानसिकता बन गई है जिसे सुधारने की बहुत आवश्यकता है । इस समाज में जितना अधिकार पुरुषों का है उतना ही बराबर का अधिकार महिलाओं का बनता है , अक्सर लोग यह भूल जाते हैं कि समाज को चलाने में महिलाओं का उतना ही योगदान रहा है जितना पुरुषों का रहा है । सम्मान दोनों का होना चाहिए ना कि केवल पुरुषों का, रूढ़िवादी विचारधारा ने किस समाज को एक पुरुष प्रधान बना के रख दिया है ।

अगर इतिहास देखा जाए तो यह देश ऐसा रहा है जहां औरतों को देवी का दर्जा दिया गया है, और पूजा गया है और आगे भी पूजा जाता रहेगा, परंतु औरतों के प्रति कुछ ऐसी कुप्रथा ए भी रही हैं उनमें से एक है सती प्रथा जहाँ महिलाओं को उनके पति के मृत्यु के बाद उनके साथ दिला दिया जाता था उस दर्द को सिर्फ वही समझ सकता है जो उसे खेलता है या जिस पर वह बितती है।

Some Example’s oof Women Exploitation

आम्रपाली वह महिला जिसकी सुंदरता ही उसकी दुश्मन बन गई लोगों ने अपने कामवासना को पूरी करने के लिए उसे नगरवधू या वेश्या बना डाला ताकि वह अपनी नामर्दानगी साबित कर सके।

थोड़ा और पीछे जाएँ तो महाभारत और रामायण काल में भीकुछ किस्से ऐसे पाए गए है जहाँ महिलाओं के साथ गलत किया गया है, जहां रामायण में सीता माता और देवी अहिल्या के चरित्र पर सवाल उठाया गया, जहां उनका कोई दोष नहीं था फिर भी अहिल्या को पत्थर बनने का  श्राप मिला। समाज अपनी उन गलतियों से भी नहीं सुधरा आगे चलकर महाभारत में भी स्त्रियों के साथ दुर्व्यवहार किया गया जहां एक पुरुष ने जुए में अपनी पत्नी को दांव पर लगा डाला था वहीँ एक दूसरे पुरुष ने उसे भरी सभा में निर्वस्त्र करने की कोशिश की।

उस वक्त भी किसी ने उनके लिए आवाज नहीं उठाई ना ही उनके सम्मान की रक्षा के लिए आगे बढ़ा।

यह कुप्रथा युगो -युगो से चलती आई है महिलाओं को हर बार अग्निपरीक्षा से होकर गुजरना पड़ा है हर बार खुद के अस्तित्व के लिए लड़ना पड़ा है संघर्ष करना पड़ा है।

During Mughal’s Era

मुग़लो के समय भी यही पाया गया है , स्त्रियों को भोग विलास और बच्चे पैदा करने की यंत्र के रूप में इस्तेमाल किया गया , उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया , उनकी इज्जत लूटी गयी।युद्ध के दौरान हर बार जितने के बाद वे पिपक्षी सेना के महिलाओं को अपनी भोग विलास की पूर्ति क लिए करते थे , और उनको रोज शोषण किया जाता था। महिलाओं को लेकर ये मानसिकता यही से प्रबल होती गयी है।

लोग भूल गए हैं अगर एक महिला सौम्य बनकर  संसार का पालन पोषण कर सकती है ,तो वहीं महिला चंडी का रूप लेकर उसका संहार भी कर सकती है। महिलाएं किसी भी मामले में पुरुषों से कम नहीं है जरूरत है तो बस उन्हें मौका देने का।

एक मौका तो दे कर देखो उन्हें अपने सपने पूरे करने का फिर देखो वह सफलताओं के कितने मिशाल कायम कर सकती हैं।  

आज लोगों को यह समझने की आवश्यकता है कि जिस प्रकार जीवन को लेकर उनके सपने होते हैं उसी प्रकार महिलाओं के भी अनेक सपने होते है ,कि वह घर की चार दीवारी से बाहर निकले, अपने पंख फैलाए उस्मान की ऊंचाइयों से ऊंचा उड़ें और अपने माता पिता और परिवार का नाम रोशन करें। केवल बच्चे पैदा करना और घर सँभालने तक ही सिमित नहीं है उनकी दुनिया।

नाजाने यह कैसी मानसिकता है लोग बेटियों को घर की लक्ष्मी मानते हैं परंतु उसी को बोझ भी समझते हैं।

Modern Era

आज की सदी में जहां लोग खुद को मॉडर्न बताते हैं खुद को ओपन माइंडेड बोलते  हैं ,परंतु वही जब महिलाओं को लेकर उनके सपनों को पूरा करने की बारी आती है तो यही वह मॉडर्न समाज यह कहकर उनके पंख कुतर देता है ,लड़की केवल घर का काम करने के लिए पैदा हुई है।

ऐसा नहीं है  कि समाज में सारे पुरुष इस रूढ़िवादी मानसिकता से ग्रस्त है, बहुत से लोग आगे बढ़कर महिलाओं का सम्मान करते हैं उनका साथ देते हैं। परंतु कहते हैं ना एक गंदी मछली पूरे तालाब को गंदा कर देती है उसी प्रकार कुछ लोग हैं जिससे महिलाओं की तरक्की  देखी नहीं जाती। वे उन्हें आगे बढ़ने नहीं देते ना ही देख सकते हैं कि एक महिला उनसे आगे कैसे जा सकती है।

और भी ऐसी कई कुप्रथांए रही है महिलाओं को लेकर , परन्तु आज हम ACID ATTACK जैसे संगीन मुद्दे पर ये article लिख रहे है , इस्पे प्रकाश डाल रहे है ।

आशा करता हूं यहां तक पढ़ने के बाद आप यह भली-भांति समझ गए होंगे कि समाज में ऐसा क्यों हो रहा है महिलाओं के सपनों को कुचल दिया जाता है या उसे कुचलने की कोशिश की जाती है । इसकी जिम्मेदारी बहुत हद तक उनके परिवार वालों का होता है , बच्चे वही सीखते हैं जो वह अपने घरों में देखते हैं और आगे जाकर वह वैसा ही बर्ताव करते हैं।

LIST OF SOME EMPOWERED WOMAN

देखा जाए तो हम यही पाएंगे कि समाज में जब भी कोई परिवर्तन हुआ है उसमें महिलाओं का एक अहम योगदान रहा है चाहे रामायण में रावण का वध  हो या महाभारत में कौरवों का। यह समाज हमेशा से ही ऋणी रहा है महिलाओं का और उनके योगदान का कर्जदार।

ऐसी बहुतसी  महिलाएं हैं जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों का एक लड़ाके की तरह सामना किया और समाज को बताया की छोरियां किसी भी छोरे से कम नहीं है जैसे आनंदीबाई गोपाल राव, किरण बेदी, मैरी कॉम, कल्पना चावला, ओफ्रा विनफ्रे ,किरण बेदी, जेके रॉलिंग, सानिया मिर्जा ,साइना नेहवाल, हिमा दास, दीपा करमाकर आदि, दोस्तों लिस्ट बहुत लंबी है यह आर्टिकल भी छोटा पड़ जाएगा  उनके  लिए।

परंतु आज हम देश की उस बेटी के बारे में बात करने वाले हैं जिसने जीवन जीने की एक नई राह दिखाई विपरीत परिस्थितियों का सामना करना सिखाया और सबके लिए एक आदर्श बनी तथा देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया।

आइए जानते हैं लक्ष्मी अग्रवाल के बारे में जिन्होंने अपने ऊपर हुए अत्याचार का डट के सामना किया और प्रेरणा बनी भारत और  विश्व के महिलाओं के लिए।

LAXMI AGGARWAL (WOMEN EMPOWERMENT)

1990 में लक्ष्मी का जन्म दिल्ली के एक मध्यम परिवार में हुआ। वो बेहद शांत, खूबसूरत और खुशनुमा स्वाभाव की लड़की थी। लक्ष्मी अग्रवाल को गाने का बहुत शौक था। वो एक सिंगर बनना चाहती थी। उनका सपना कुछ बनने का था और आसमान की ऊंचाइयों को छूने का था।

मगर उन्होंने कभी सपने में भी नही सोचा था कि 15 साल की उम्र में 32 वर्ष का कोई सरफिरा आदमी दिल्ली की खान मार्किट में अपने तीन दोस्तों के साथ मिलकर एक ऐसे गुनाह को अंजाम देगा जो उनकी पूरी जिन्दगी को हमेशा के लिए बदल देगा।

ये बात 2005 की है उस समय वो अपने स्कूल से लौट रही थी कि एक 32 साल के आवारा सरफिरे Guddu(नईम खान ) ने शादी के प्रस्ताव को नकारे जाने के कारण अपने दोस्तों के साथ मिलकर दिन दिहाड़े और भरे बाजार उस पर Acid Attack कर दिया।

इस दुर्घटना में लक्ष्मी के चेहरे के साथ-साथ शारीर का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह झुलस गया था। उनके परिवार ने पूरे  जीवन भर की कमाई  बेटी के इलाज पर खर्च कर दिया,  सर्जरी के लक्ष्मी की जान तो बचा ली गयी , मगर उनकी सूरत पूरी तरह से ख़राब हो गयी और शरीर का काफी हिस्सा झुलस भी गया।

Unexpected Behavior of Society

इन सब से ज्यादा लक्ष्मी को समाज के बदले रवैये से बहुत तकलीफ हुई। ऐसा लग रहा था जैसे उनके साथ नहीं बल्कि उन्होंने किसी दूसरे के साथ गलत व्यवहार किया हो। वो जहाँ भी जाती लोग उन्हें बड़ी अजीब नज़र से देखा करते , जिससे उन्हें और भी ज्यादा दुःख होता था। इन सबके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी , और फैसला किया की वो समाज का सामना करेंगी और उनके प्रति समाज के इस रवैये को बदल के रहेंगी।

2006 में लक्ष्मी ने इन तीनो आरोपियों के खिलाफ Delhi High Court में एक PIL दाखिल की और तीनो आरोपियों को जेल की हवा भी खिलाई।

Acid  की बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए एक याचिका के लिए 27,000 हस्ताक्षर एकत्र करने और भारतीय सर्वोच्च न्यायालय में एसिड हमलों के खिलाफ भी वकालत की है। उनकी याचिका ने उच्चतम न्यायालय को केंद्र और राज्य सरकारों को एसिड की बिक्री को विनियमित करने का आदेश दिया, और संसद ने एसिड हमलों के अभियोग को आगे बढ़ाने के लिए आसान बना दिया।

जिंदगी की इसी लड़ाई के दौरान 2012 में उसके पिता की भी मृत्यु हो गयी। वो घर मे इकलौते कमाने वाले थे।

परन्तु वे इनसब से विचलित नहीं हुई ,लक्ष्मी ने परिवार चलाने के लिए सिलाई तथा beautician का काम सीखा और थोड़े बहुत पैसे कमाने लग गई। यह बहुत ही अजीब वाकया था एक लड़की जिसका खुद का चेहरा अब पहले जैसा खूबसूरत न रह गया हो वो अब दूसरों के पहनावे और चेहरे को सजाती थी। अक्सर लोग उस से सहानुभूति तो रखते थे मगर आम लोगों जैसा व्यवहार नही करते थे ।

Stop Sale Acid Initiative

इसके बाद लक्ष्मी ने अन्य ACID ATTACK से पीड़ित महिलाओं के साथ मिलकर तुरंत न्याय की मांग के लिए भूख हड़ताल शुरू कर दी और ACID ATTACK पीड़ित महिलाओं के पुनर्वास की मांग की।

ACHIEVEMENTS OF LAXMI AGGARWAL

उसके बाद वे STOP SALE ACID की संस्थापक बनि , जो ACID हिंसा और ACID की बिक्री के खिलाफ एक एक बड़ा अभियान साबित हुआ ।

लक्ष्मी ने #StopSaleAcid के साथ इस अभियान की शुरुआत की जिसने राष्ट्रव्यापी व्यापक समर्थन हासिल किया।

महिला और बाल विकास मंत्रालय, पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय और उनके अभियान स्टॉप सेल एसिड के लिए यूनिसेफ से अंतर्राष्ट्रीय महिला सशक्तिकरण पुरस्कार 2019 में मिला।

लक्ष्मी को यूएस फर्स्ट लेडी मिशेल ओबामा द्वारा 2014 का अंतर्राष्ट्रीय महिला सम्मान पुरस्कार मिला।

उन्हें एनडीटीवी इंडियन ऑफ़ द ईयर के रूप में भी चुना गया था।

LOVE LIFE

जनवरी 2014 तक वह सामाजिक कार्यकर्ता आलोक दीक्षित के साथ प्यार में है। आलोक ने शादी नहीं करने और लिव-इन रिलेशनशिप में रहने का फैसला किया। “हमने मरने तक एक साथ रहने का फैसला किया है। लेकिन हम शादी नहीं करके समाज को चुनौती दे रहे हैं। हम नहीं चाहते कि लोग हमारी शादी में आएं और लक्ष्मी के लुक पर टिप्पणी करें। लोगों के लिए दुल्हन का रूप सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसलिए हमने तय किया कि कोई समारोह न हो, “आलोक ने कहा। उनके परिवारों ने रिश्ते को स्वीकार कर लिया है और यह भी कि उनका औपचारिक विवाह नहीं होना है। उनकी अब एक बेटी है जिसका नाम पिहू है।

Partner’s Support

लक्ष्मी कहती है कि मेरे चेहरे की 7 बड़ी surgery होने के बाद मैंने कभी नही सोचा था कि मुझे कभी कोई जीवन साथी मिलेगा। जीवन साथी तो दूर की बात मैं तो सोचती थी कि मुझे तो कोई अपनाने को भी तैयार नही होगा।

आलोक के इस कदम की जितनी भी तारीफ की जाए को कम है। आलोक ने दुनिया के तय किये गए “खूबसूरती” के पैमानों को झूठा साबित कर दिया और  इंसानियत की नई मिसाल पेश कर दी।

आज लक्ष्मी और उस का परिवार बेहद खुश और सम्पन है। Nov 2015 में लक्ष्मी और आलोक एक नन्ही परी के माता पिता बन गए। उस नन्ही परी का नाम पीहू है।

Chhanv Foundation

आज लक्ष्मी और आलोक मिलकर “Chhanv Foundation” (छांव फाउंडेशन) नाम की NGO को संभालते हैं जो acid attack के प्रभावितों के लिए काम करती है।

तो दोस्तों यह थी हमारी देश की वीर बेटी लक्ष्मी अग्रवाल जिन्होंने अपने ऊपर बीती हर उस आपदाओं का डट कर सामना , जीवन को लेकर खुद की और समाज की दृष्टि को एक नयी राह दिखाई। और उन लोगो के लिए एक प्रेरणा का स्त्रोत बानी जो अक्सर अपने ऊपर हुए जुल्म को सेह लेती है और कभी किसी को नहीं बताती। खुद के लिए हमें , खुद ही लड़ना पड़ता है , ये दुनिया को सीखा रहीं है लक्ष्मी अग्रवाल।

उनके जीवन से प्रेरित होकर बॉलीवुड की जानीमानी अभिनेत्री दीपिका पादुकोण की ” छपाक” “Chhapak ” फिल्म आ रही है। जिसमे दिखाया गया है उनके जीवन का संघर्ष और विजय की ।

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CONCLUSION

अंत में यही कहना चाहूंगा की , हमें ये जानने की बहुत ही आवश्यकता है की , हमसे ही समाज बानी है। अगर समाज में बुराई है तो वो बुराई हम्मे भी है , अगर समाज में अच्छाई है तो वो भी हमसे ही है। गलत प्रथाओं का विरोध करना बहुत ही आवश्यक हो चूका है , क्युकी जो कल लक्समी अग्रवाल के साथ हुआ है , वो कल हमारे साथ भी हो सकता है। जरुरी है की हम सब समाज को लेकर जागरूक रहे, आपसे में समन्वय बना कर रखे।

अच्छी बाते सोचे और समाज में बांटे , अंग्रेजी में एक कहावत है “charity begins at home” , जिसका अर्थ है परोपकार अपने ही घर से आरम्भ होती है। हमें अपने लोगो को जागरूक करना होगा , महिलाओ को लेकर जो अवधारणा बानी हुई है उसे ख़त्म करने में ये बहुत ही कारीगर सिद्ध होगा।

आशा करता हु ये आर्टिकल आपक्को पसंद आया होगा , आपको प्रेरणा मिली होगी लक्ष्मी अग्रवाल के जीवन से।

धन्यवाद
जय हिन्द !!!

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