Diwali

Diwali : Ray of Positiveness | दिवाली : सकारात्मकता की किरण।

Diwali 2019
Diwali : diya decoration

भारतवर्ष सदियों से अपनी परंपरा सभ्यता और संस्कृति से पहचाना जाता रहा है और भविष्य में भी हमेशा पहचाना जाएगा। इसी तरह भारतवर्ष के त्योहारों (festivals) का भी सबसे बड़ा योगदान रहा है जो संपूर्ण भारत (India) को एकजुट होकर उन्हें मनाने का अवसर प्रदान करता है, भारत में हर त्यौहार को मनाने के पीछे एक कहानी के साथ-साथ उससे जुड़ी सकारात्मक भावना है जो संपूर्ण भारत को बुराई पर अच्छाई की विजय गाथा का ज्ञान कराती है, जहां हर त्योहार का अपना आप अलग ही महत्व होता है दिवाली (Diwali) भी भारतवर्ष का सबसे बड़ा त्यौहार है जिसे संपूर्ण भारत मिलजुल कर सदियों से अलग-अलग तरीकों से मनाता रहा है ।

दिवाली (Diwali) को दीपावली ( deepavali  ) भी कहा जाता है जहा दीपावली (deepavali ) का अर्थ दीपो की पंक्ति (Diyas) से है। हिंदू सभ्यता में मोगली दीपावली पवित्र माना जाता है । दीपावली अमावस्या की काली रात को मनाई जाती है जिसका अर्थ है कि बुराई को प्रदर्शित करती काली रात को चमकदार दिए जलाकर रोशनी की अच्छाई में बदलना है

दीपावली (Diwali ) को मानाने के पीछे कई सारी साकारत्मक कहानियाँ प्रसिद्ध है जिन सभी का अर्थ साकारत्मक ऊर्जा का संचार और अधर्म पर धर्म की विजय को दर्शाता है फिर वो “रामायण” से जुडी श्री राम और रावण की हो, या फिर श्री कृष्ण और नरकासुर की हो। प्राचीन हिंदू वेदों द्वारा ये भी कहा जाता है की इस दिन माता लक्ष्मी का भी जन्म दिवाली के इसी शुभ दिन हुआ था जिस कारण उनकी पूजा की जाती है ।

दीवाली (Diwali) मानाने का सबसे प्रमुख कारण रामायण के संदर्भ में है जिसके अंतर्गत प्रभु श्री राम ने रावण को हराकर बुराई का नाश किया था जिसे हम दशहरा के रूप में मानते है और सीता माता को रावण की कैद से वापस लाये थे जो कि एक सुनहरा दिन था सभी भारतवासियों के लिए । जिसके 15-20 दिनों बाद श्री राम, माता सीता और भ्राता लक्ष्मण 14 वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या लौट आये थे । श्री राम के अयोध्या वापस आने की ख़ुशी में अयोध्यावासियों ने अमावस्या की काली रात को चमकदार बनाने के लिए घी के दिए जला कर प्रभु श्री राम का स्वागत किया था । तभी से दिवाली एक सकारात्मक रूप में मनाई जाती है जिससे एक नए वर्ष की शुरआत सकारात्मक ऊर्जा के साथ हो ।

दिवाली (Diwali) के पांच दिन ।

  1. धन्वंतरी त्रयोदशी – पहला दिन है जो भारत में दिवाली के त्योहार को चिह्नित करता है ।


कार्तिक के विक्रम संवत हिंदू कैलेंडर महीने में कृष्ण पक्ष (तेरहवें पखवाड़े) के तेरहवें चंद्र दिवस पर धनतेरस मनाया जाता है। धन्वंतरि, जिन्हें धनतेरस के अवसर पर भी पूजा जाता है, वे आयुर्वेद के देवता हैं जिन्होंने मानव जाति की भलाई के लिए आयुर्वेद का ज्ञान दिया और बीमारी के कष्ट से छुटकारा पाने में मदद की।

धनतेरस पर भगवान धन्वंतरी की पूजा होती है। भगवान धन्वंतरि, हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान उभरे थे, एक हाथ में अमृत से भरा कलश और दूसरे हाथ में आयुर्वेद के बारे में पवित्र पाठ था। उन्हें देवताओं का वैद्य माना जाता है।

2. नरका चतुर्दशी ।

दिवाली के प्रत्येक दिन की अपनी कहानी है। त्यौहार के एक दिन पहले नरका चतुर्दशी भगवान कृष्ण और उनकी पत्नी सत्यभामा द्वारा राक्षस नरका के वध का प्रतीक है।
जहाँ भगवान कृष्ण ने 16,000 बंदी राजकुमारियों को बचाया था ।

जैसा कि राजकुमारियों की शुद्धता पर सवाल उठाया जा सकता है, भगवान कृष्ण ने उन सभी से शादी की।

3. दीपावली (Diwali) के दिन ।

दीपावली के दिन अमावस्या को माता लक्ष्मी की पूजा तब होती है जब वह अपने भक्तों की मनोकामनाओं को पूरा करती हैं। अमावस्या भगवान विष्णु की कहानी भी बताती है, जिन्होंने अपने बौने अवतार में, अत्याचारी बाली को मार डाला और उसे नरक में पहुंचा दिया। बाली एक बार एक साल पृथ्वी पर लौटने के लिए लैंप के लाखों प्रकाश और अंधकार और अज्ञान को दूर करते हुए प्रेम और ज्ञान की चमक के प्रसार के लिए अनुमति दी है।

इस दिन भगवान श्री राम ने एक महाकाव्य लड़ाई के बाद अपनी पत्नी को राक्षस रावण से बचाया था अयोध्या लौटे थे। आज बुराई और घर वापसी पर अच्छाई की जीत दिखाने के लिए मोमबत्तिया और दिए जलाए जाते हैं। घर में लक्ष्मी का स्वागत करने के लिए अन्य भारतीयों के बीच गुजराती भारतीय भी अपनी खिड़कियों में दीपक जलाते हैं।

त्योहार के उच्च बिंदु को चिह्नित करने के लिए आतिशबाजी की जाती है। यह कई क्षेत्रों में हिंदू वर्ष का अंतिम दिन है, जब व्यवसाय पुराने खातों को बंद कर देते हैं।

4. गोवर्धन पूजा।

भोजन का पर्वत गोवर्धन पहाड़ी का प्रतीक है। इस पारंपरिक कहानी में श्री कृष्ण ने स्वर्ग के राजा इंद्र की वजह से बाढ़ से ग्रामीणों को आश्रय देने के लिए पहाड़ी को उठा लिया था । इंद्र, हिंदुओं की तरह ही परमात्मा के सामने विनम्र होना सीखते हैं।

5. भाई दूज ।

भाई दूज त्यौहार मानाने के पीछे भी एक कहानी बताई जाती है जिसके अंतर्गत श्री कृष्ण नरकासुर का वध करने के बाद अपनी बहन सुभद्रा के घर गए थे और वहा उनकी बहन सुभद्रा ने तिलक कर उनका स्वागत फूलों और मिठाइयों के साथ किया था। इस तरह भाई दूज त्यौहार मानाने की शुरुआत हुई। इस दिन को यम द्वितीया (जिसे भाई दूज भी कहा जाता है) कहा जाता है, और इस दिन बहनें अपने भाइयों को अपने घरों में आमंत्रित करती हैं।

दूज त्यौहार मानाने की शुरुआत हुई। इस दिन को यम द्वितीया (जिसे भाई दूज भी कहा जाता है) कहा जाता है, और इस दिन बहनें अपने भाइयों को अपने घरों में आमंत्रित करती हैं।

रोशनी और पटाखों का महत्व

दिवाली के सभी सरल अनुष्ठानों का एक महत्व और उनके पीछे एक कहानी है। घरों को रोशनी से रोशन किया जाता है, और पटाखे आकाश को स्वास्थ्य, धन, ज्ञान, शांति, और समृद्धि की प्राप्ति के लिए स्वर्ग के सम्मान के रूप में भरते हैं।

एक मान्यता के अनुसार, पटाखों की आवाज पृथ्वी पर रहने वाले लोगों की खुशी को इंगित करती है, जिससे देवताओं को उनकी भरपूर स्थिति के बारे में पता चलता है। अभी भी एक और संभावित कारण का अधिक वैज्ञानिक आधार है: पटाखों द्वारा उत्पादित धुएं मच्छरों सहित कई कीड़ों को मारते हैं या पीछे हटा देते हैं, जो बारिश के बाद भरपूर मात्रा में होते हैं।

दिवाली (Diwali) का आध्यात्मिक महत्व

रोशनी, जुआ और मस्ती से परे, दिवाली भी जीवन को प्रतिबिंबित करने और आगामी वर्ष के लिए बदलाव लाने का समय है। इसके साथ, ऐसे कई रिवाज हैं जो प्रति वर्ष प्रिय होते हैं।

देना और क्षमा करना।–

 यह आम बात है कि लोग दीवाली के दौरान दूसरों के द्वारा किए गए गलतियों को भूल जाते हैं और माफ कर देते हैं। हर जगह स्वतंत्रता, उत्सव और मित्रता की एक हवा है।

एकजुट और एकीकृत करें।

 दिवाली एक एकीकृत घटना है, और यह दिलों के सबसे कठिन को भी नरम कर सकती है। यह एक ऐसा समय है जब लोग खुशी में झूमते हैं और एक-दूसरे को गले लगाते हैं।

जिन लोगों के मन में आत्मिक कान होते हैं, वे स्पष्ट रूप से ऋषियों की आवाज सुनेंगे, “हे भगवान के बच्चों को एकजुट करो, और सभी को प्यार करो।” प्रेम के अभिवादन से उत्पन्न कंपन, जो वातावरण को भर देते हैं, शक्तिशाली हैं। जब दिल काफ़ी सख्त हो गया है, तो दीपावली के एक निरंतर उत्सव से घृणा के विनाशकारी रास्ते से दूर होने की तत्काल आवश्यकता को फिर से जन्म मिल सकता है।

अपने भीतर के आत्म को रोशन करें। दिवाली की रोशनी आंतरिक रोशनी के समय को भी दर्शाती है। हिंदुओं का मानना ​​है कि रोशनी की रोशनी वह है जो दिल के कक्ष में लगातार चमकती है। चुपचाप बैठना और इस परम ज्योति पर मन को स्थिर करना आत्मा को रोशन करता है। यह अनन्त आनंद की खेती और आनंद लेने का अवसर है।

अंधेरे से उजाले तक

दीपावली की प्रत्येक पौराणिक कथा, मिथक और कहानी में बुराई पर अच्छाई की जीत का महत्व निहित है। दीपावली हमारे घरों और दिलों को रोशन करते हैं , यह सभी प्राणियों के मन और जीवन से अंधकार को दूर करता है , और उन्हें आशा की नयी किरण की और ले जाता है ।

प्रकाश हमें स्वयं को अच्छे कार्यों के लिए प्रतिबद्ध करता है और हमें देवत्व के करीब लाता है। दिवाली के दौरान, रोशनी भारत के हर कोने को रोशन करती है, और पटाखों की आवाज़, खुशी, उत्साह और आशा के साथ घुलने वाली अगरबत्ती की खुशबू हवा में लटक जाती है।

दीपावली निष्कर्ष

दीपावली (Diwali) से हमें यही सीख मिलती है की , बुराई चाहे कितनी भी प्रबल और ताकतवर क्यों ना हो, अच्छाई उसे हरा हि देती है , जैसे हर गहरे रात्रि के बाद एक रौशनी की किरण फूटती है , उसी प्रकार हर बुराई को अच्छी के सामने झुतना ही पड़ता है, मन में हमें आशा की ज्योति जलाये रखनी चाहिए , और अच्छे कर्म करते रहने चाहिए , हमारे कर्म ही हमारे आगे के जीवन को निर्धारित करती है की, वो जीवन सुखद होगा या दुखद।

इस दिवाली आप ये प्रण ले , की कभी निराश नहीं होंगे , सदा मुस्कुराते रहेंगे और दुसरो को खुशियां बांटते रहेंगे , और सत्य के मार्ग पे चलते रहेंगे।

अच्छे कर्म का परिणाम भी अच्छा होता है

जय हिन्द !!
जय भारती !!

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