maharana pratap history

Maharana Pratap -Inspirational Warrior

Maharana Pratap

धन्य है इस देश की माटी जिसने जन्मा महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) जैसे शूरवीर को –

राणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को  कुंभलगढ़ में हुआ उनके  पिता राणा उदय सिंह और माता रानी जयवंती बाई थे,  यही वह महान माता थी जिन्होंने प्रताप को जन्मा और वह केवल माता ही नहीं थी, वे प्रताप की गुरु भी बनीं,  बचपन से प्रताप नेतृत्व (leadership) में महारथ थे,  वो कहते हैं ना पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं ठीक उसी प्रकार प्रताप बचपन से ही लीडरशिप में महारत थे,  बाल्यकाल में ही खेल खेल में मैं अपने दोस्तों को एक घूंट में बांट दिया करते थे और इनकी अवलोकन कौशल ( Observation skills) इतनी कमाल की थी कि उन्हें पता रहता था कि किस-किस में क्या-क्या गुण है और उसी के आधार पर वे अपने दोस्तों को उनका कार्य निर्धारित किया करते थे कि कौन क्या करेगा |

बचपन में ही उन्होंने पूरे अस्त्र शस्त्र चलाने सीख,  सभी सैन्य शिक्षा प्राप्त किया, उनके परिवार में और भी कई लोग थे जिनकी महानता एक से बढ़कर एक थी जैसे राणा सांगा,  बप्पा रावल,  राणा हमीर और राणा प्रताप,  परंतु यह केवल एक लौते  ही थे जिन्हें महा राणा प्रताप का दर्जा दिया गया |

महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) का प्रथम राज्य अभिषेक 28 फरवरी 1572 में गोगुंदा में हुआ, लेकिन विधि विधान स्वरूप राणा प्रताप का द्वितीय राज्य अभिषेक 1572 ईस्वी में ही कुंभलगढ़ दुर्ग में हुआ तथा वे मेवाड़ के तेरे तेरहवें राजा बने |

महाराणा प्रताप की बहुत ही अविश्वसनीय कद काठी हुआ करती थी वह 7.5 फीट के थे और युद्ध में जाने के दौरान वह 80 किलो का कवच 10-10 किलो के जूते, 10-10 किलो के तलवार तथा 80 किलो का भाला उठाकर युद्ध करते थे|

प्रताप एक महान व्यक्ता भी थे वे अपने सैनिकों को कुछ इस तरह उत्साहित कर देते थे कि वे प्रताप के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते थे, किसी भी युद्ध में लड़ने के लिए वह खुद को बहुत ही गौरवशाली माना करते थे |

साथी तेरा घोड़ा चेतक जिसपे तु सवारी करता था, थी तुझमें ऐसी खास बात जो अकबर भी तुझ से डरता था

मेवाड़ी राजा राजस्थान के सबसे शक्तिशाली और महान राजा हुआ करते थे जिन्होंने कभी अकबर को कभी जितने नहीं दिया, यह वही अकबर था जो पूरी भारत को जीत चुका था वह,अकबर कभी हरा नहीं पाया प्रताप को, और ना ही कभी उनका सामना करा किसी भी युद्ध में, अकबर ने कई बार इनसे संधि करने की कोशिश की, कई बार प्रलोभन देकर अपने राजदूतों को भेजा ताकि में अकबर की अधीनता स्वीकार कर ले, एक बार तो अकबर ने उन्हें आधा देश देने को तैयार हो गए थे और बदले में वह मेवाड़ अपने नाम करवाना चाहते थे |

हल्दीघाटी का युद्ध इसलिए हुआ क्योंकि प्रताप ने अकबर की अधीनता स्वीकार करने से मना कर दिया था, जबकि उस समय राजस्थान के लगभग सारे राजाओं ने अकबर के आगे समर्पण कर दिया था | हल्दीघाटी का युद्ध केवल 1 दिन में ही समाप्त हो,  गया जब 21 जून 1576 प्रताप और अकबर की सेना आमने-सामने हुई थी, प्रताप की सेना में राम सिंह तंवर, कृष्णदास ,रामदास राठौर, झाला आदि जैसे योद्धा थे |

प्रताप (Maharana Pratap) की सेना की अगुवाई अफगानी राजा हकीम सूर ने की जिसके परिवार से अकबर का पुराना बैर था, प्रताप की सेना की ओर से आदिवासियों की तरफ से 400-500 भील भी शामिल थे ,जिसका नेतृत्व भील राजा राम कुंजा कर रहे थे, भील शुरुआती से ही राजपूतों के स्वामी भक्त रहे हैं, राजस्थान का इतिहास लिखने वाले जेम्स टॉड के अनुसार हल्दीघाटी के युद्ध में प्रताप की सेना में 20000 से लेकर 22000 सैनिक थे जबकि अकबर की सेना में 80000 से 100000 तक सैनिक थे |

दूसरी तरफ अकबर की सेना का नेतृत्व करने के लिए  खुद अकबर ना आकर आमेर के राजा मानसिंह को सेनापति बनाकर प्रताप से लड़ने के लिए भेजा उनके साथ बहलोल खान, सैयद अहमद खान, मुल्तान खान ,गाजी खान ,वसीम खान जैसे योद्धा थे |

प्रताप ने अपनी सेना को चार भागों में बांट दिया था सबसे आगे हकीम खान और सबसे पीछे राव पूंजा,, बाई तरफ झाला मानसिंह दाएं तरफ राम सिंह तंवर थे जबकि प्रताप अपने मंत्री भामाशाह के साथ युद्ध भूमि के बीच में तैनात थे, 1576 में अकबर ने मानसिंह और आसिफ खान को प्रताप की सेना से मुकाबला करने के लिए भेजा जो खमनोर आकर रुकी थी दूसरी तरफ प्रताप की सेना हल्दीघाटी आकर रुकी थी, प्रताप के लिए सबसे दुख की बात यह थी कि उनका सगा भाई शक्ति सिंह मुगलों के साथ था और अकबर को इस  पहाड़ी इलाके में युद्ध करने की रणनीति बनाने में सहायता कर रहा था ताकि युद्ध में कम से कम मुगलों के सैनिक मरे |

21 जून 1576 को दोनों सेनाएं आगे बढ़ी और लख्त लाई पर दोनों सेना के बीच घमासान युद्ध हुआ जो केवल 4 घंटे में ही खत्म हुआ ,पहाड़ी इलाके में युद्ध होने के कारण इसका फायदा प्रताप ने उठाया क्योंकि वह बचपन से ही इन इलाकों से भलीभांति परिचित थे,  इस युद्ध को  इतिहास में अनिर्णायक घोषित किया गया जबकि प्रताप की सेना ने अकबर की सेना के छक्के छुड़ा दिए थे |

हल्दीघाटी के युद्ध में प्रताप की सेना में हकीम खान सूर, डोडिया भीम, मान सिंह, झाला ,राम सिंह तंवर और उनके पुत्रों सहित अनेकों राजपूत शहीद हुए, हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप ने अकबर के सबसे बड़े सेनापति को बहलोल खान को तलवार के एक  ही काट से घोड़े समेत चीर डाला था |

अकबर की सेना में मानसिंह के अलावा सभी बड़े योद्धा मारे गए, युद्ध में जब राणा प्रताप मानसिंह के करीब पहुंच गए थे और अपने घोड़े चेतक को मानसिंह के हाथी का चढ़ाया और भाले से मानसिंह को मारने के लिए वार किया मानसिंह तो बच गया परंतु उनका महावत मारा गया, चेतक जब हाथी से उतरा तब हाथी की सूंड में लगे तलवार से उसका एक पैर कट गया |

जितने महान महाराणा प्रताप थे उतना ही महान उनका घोड़ा चेतक था,

राणा प्रताप युद्ध में अलग-थलग पड़ गए थे उनकी जान बचाने के लिए चेतक  प्रताप को लेकर भागा ,3 किलोमीटर दौड़ने के बाद अचानक सामने एक 28 फीट चौड़ा नाला आया, जिसे चेतक ने बड़े बहादुरी के साथ एक छलांग में टाप गया , चेतक ने अपना कर्तव्य निभाते हुए अपनी राजा महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) की जान बचाई और उस लंबी छलांग के कारण उसे अपने प्राण त्याग ने पड़े |

Maharana Pratap-the great warrior

उस समय उनके भाई शक्ति सिंह उनके पीछे थे, शक्ति सिंह को उनके भूल का एहसास हुआ और उन्होंने अपने भाई की मदद की, दूसरी तरफ प्रताप के रण से चले जाने के बाद उनके स्थान पर उनके हमशक्ल झाला मानसिंह ने उनका मुकुट पहनकर मुगलों को भ्रमित किया, उनको प्रताप समझकर मुगल उन पर टूट पड़े और इसमें झाला मानसिंह शहीद हो गए |

महाराणा प्रताप के पास चेतक ही नहीं था, उनके पास रामप्रसाद नाम का एक हाथी भी था

रामप्रसाद की हर युद्ध में अहम भूमिका हुआ करती थी, हल्दीघाटी के युद्ध में अकबर के 10 हाथी मार दिए और कई घोड़े मार दिए इनके आगे सूंढ़ पे एक घातक तलवार लगी थी जिसके कारण कोई भी हाथी अन्य पशुओं के सामने टिक नहीं पाता था, राम प्रसाद को पकड़ने के लिए अकबर ने 10 हाथियों का चक्रव्यूह रचा और उन्हें जैसे तैसे करके बंधी बना लिया |

 रामप्रसाद एक हाथी था जिसने अपने राजा महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) के वियोग में अन्न और जल ग्रहण  करना करना छोड़ दिया, अकबर ने बहुत प्रयास किए ,परन्तु उसने कुछ नहीं खाया, और   कमजोर होने के कारण और अंत  में उसने शरीर को त्याग दिया |

यह देखकर अकबर बोला जिस राणा प्रताप के हाथी ने उसके सामने सर नहीं झुकाया, वो राणा प्रताप का सर कैसे झुका सकते थे,  बाद में अकबर ने हाथी रामप्रसाद का नाम रखा पीर रखा |

हल्दीघाटी के युद्ध के बाद महाराणा प्रताप का दिल पसीज गया और उन्होंने प्रण लिया मुगलों से जीतने तक राजकीय ठाट पाट जाकर जंगल में निवास करेंगे और वहां उन्होंने घास की रोटियां खाई, कंदमूल, उबले हुए भोजन खाए, पत्थरों की सैया बनाकर उस पर सोए, मेवाड़ तब तक सुरक्षित था जब तक महाराणा प्रताप जीवित थे , अकबर की कभी हिम्मत ना हुई कि इनका युद्ध में सामना कर सकें, उसे पता था और कभी सामने से इनसे नहीं जी सकता था क्योंकि वह जानता था कि राणा प्रताप में एक ही तलवार के वार से उसके सेनापति बहलोल खान को घोड़े समेत काट डाला था |

महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) एक ऐसे राजा थे जो कभी व्यर्थ के कामों में अपना समय नहीं गंवाया करते थे,  वे अपना कीमती समय अपने सेना के साथ व्यतीत करते थे उन्हें हमेशा प्रोत्साहित और पहले से बेहतर बनाया करते थे, नए-नए युद्ध नीतियां बनाया करते थे उनके रहन-सहन को अपनाते थे, वह प्रताप के लिए कुछ भी करने को तैयार थे यही कारण था कि अकबर विशाल सेना होने के बाद भी महाराणा प्रताप के सामने घुटने टेक दिए थे |

महाराणा प्रताप ने अपने सैन्य बल को बढ़ाकर कुंभलगढ़ पर पुनः विजय प्राप्त किए, सिर्फ चित्तौड़गढ़ को छोड़कर सारे मेवार को अपने अधीन कर लिया उसके बाद चावंड में उन्होंने अपनी राजधानी स्थापित की हल्दीघाटी का युद्ध इतना भयंकर था कि आज भी उस हल्दी वाली मिट्टी से खून निकलता है और आज भी तलवारों के जत्थे मिट्टी मिट्टी के नीचे से निकलते हैं युद्ध के बाद भी वहां के सिक्के नहीं बदले प्रताप के नाम से ही चलते थे अकबर के नहीं, अकबर उनके नाम से ही डरता था सोने से पहले उनके बारे में सोचने से भी डरता था |

19 जनवरी 1597 को केवल 57 वर्ष की आयु में ही प्रताप में अपने प्राण त्यागे |

हल्दीघाटी का युद्ध एक आत्मसम्मान, मातृभूमि की रक्षा और स्वाधीनता का संघर्ष था |

वीर महाराणा प्रताप (Maharana Pratap)

स्वतंत्रता की वेदी पर ऐसा अंगारा था जो आत्मसम्मान और देश, दोनों के लिए दिन-रात जलता था, दिन-रात धधकता रहता था और अंत में बुझ कर भी उसने देश के लोगो में लो भर दिया,

जिसकी प्रखर किरणों ने भारत माता को गुलामी की जंजीरों से मुक्त करने के लिए सदा प्रेरित किया |

जय हिन्द !!!

जय भारती !!!

पानीपत की तीसरी लड़ाई

Shah Rukh Khan

Shah rukh Khan
source – google

Friends, today we are going to talk about the great artist, who made himself worthy of it on the strength of hard work and will power Which today the whole world knows as Shah rukh Khan. Yes, friends, today we will know some important aspects related to the life of Shah Rukh Khan, knowing that you will know that to succeed, it is not that easy, it requires hard penance, many things have to be sacrificed, hard. Only after hard work and dedication do you see success in life.

“कभी कभी कुछ जितने के लिए कुछ हारना भी पड़ता है, और हार के जितने वाले को बाज़ीगर कहते है”

दोस्तों आज हम उस महान कलाकार की बात करने जा रहे हैं जिसने कठिन परिश्रम और इच्छा शक्ति के बल पर अपने आपको उस लायक बनाया , जिसे आज पूरी दुनिया शाहरुख खान के नाम से जानती है। जी हाँ दोस्तों आज हम जानेंगे शाहरुख़ खान के जीवन से जुड़े कुछ ऐसे महत्वपूर्ण पहलुओं को, जिसे जानकर आपको ये पता चलेगा की , सफलता पाना उतना आसान नहीं है , इसके लिए कड़ी तपस्या करनी पड़ती है, कई चीजों का त्याग करना पड़ता है , कड़ी मेहनत और लगन के बाद ही आपको जीवन में सफलता के दर्शन होते है।

वैसे तो शाहरुख के पास हारने को कुछ भी ना था , परन्तु जितने के लिए पूरी दुनिया बाहें फैलाये खड़ी थी।


Although Shah Rukh Khan had nothing to lose, for whom the whole world was standing outstretched.

तो दोस्तों इस सफर की शुरुवात होती है 2 November 1965 से जब दिल्ली के एक मुस्लिम परिवार में शाहरुख़ खान का जन्म हुआ, उनके पिता का नाम मीर ताज मुहम्मद था जो की एकस्वतंत्रता सेनानी थे और उनकी माँ का नाम लतीफ़ फातिमा । भारत के विभाजन से पहले उनका परिवार पकिस्तान के पेशावर में रहता था , उसके बाद उनके पिता दिल्ली में आ कर  बस गए। शाहरुख़ का बचपन दिल्ली के राजिंदर नगर में बिता , जहाँ उनका परिवार एक किराए के माकन में रहता था और उनके पिता एक रेस्टोरेंट चलाया करते थे।

So, friends, this journey begins 2 November Since 1965 when Shah rukh Khan was born in a Muslim family in Delhi, his father’s name was Mir Taj Muhammad who was a freedom fighter and his mother’s name was Latif Fatima. Before the partition of India, his family lived in Peshawar, Pakistan, after which his father moved to Delhi. Shahrukh spent his childhood in Delhi’s Rajinder Nagar, where his family lived in a rented house and his father ran a restaurant

शाहरुख़ खान ने अपनी शुरूआती पढाई दिल्ली के सैंट कोलंबिया से की , वे पढाई में बहुत ही अच्छे थे। और उनकी पढाई के कारण उन्हें स्कूल का सर्वोच्च पुरष्कार स्वोर्ड ऑफ़ हॉनर भी जीता था। परन्तु जब वे मात्र 16 वर्ष के ही थे की उनके जीवन में बेहत ही दुःखद समय आया जब उनके पिता की मृत्यु हो गयी।

Shah rukh Khan did his early studies from Saint Columbia School in Delhi, he was very good in studies. And because of his studies, he also won the Sword of Honour, the highest school award. But when he was only 16 years old there was a very sad time in his life when his father died.

परन्तु इतने कम उम्र में भी इतनी बड़ी मुशीबत को झेलने के बाद भी शाहरुख़ के अंदर परेशानियों से लड़ने का जज़्बा कभी भी ख़त्म नहीं हुआ, वो और भी बढ़ता गया।

But even at such a young age, even after facing such a big deal, the spirit of fighting with the troubles inside Shah rukh never ended, it grew even more.

शाहरुख़ ने स्कूल की पढाई ख़त्म करने के बाद 1985 में दिल्ली के हंसराज कॉलेज में दाखिला लिया, जहाँ उन्होंने एक थिएटर ग्रुप से जुड़े और उस ग्रुप में रहते हुए अभिनय सीखी। इसके बाद मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स की डिग्री लेने का फैसला किया परन्तु अभिनय के लिए उसकी पढाई बिच में ही छोड़ दी, और इसी दौरान उन्हों ने NATIONAL SCHOOL OF DRAMA में भी दाखिला लिया, वहां पर वे अभिनय के गुण सीखते रहे।

After finishing school, Shah Rukh admitted in  Delhi’s Hansraj College in 1985, where he joined a theater group and learned acting while staying in that group. After this, he decided to pursue a master’s degree in Mass Communication but left his studies for acting in the middle, and during this time he also enrolled in the NATIONAL SCHOOL OF DRAMA, where he continued to learn the qualities of acting.

शाहरुख़ खान का पहला रोले लेख टन्डन के TV series “दिल दरिया” में था , परन्तु किन्ही कारणों वश ये series एक साल बाद रिलीज़ हुई, और इसी दौरान शाहरुख़ खान ने फौजी नाम के टीवी सीरियल में काम कर लिया, इस तरह से उनका छोटे परदे पे आगमन फौजी नाम के सीरियल से हुआ।

Shahrukh Khan’s first role was in the Tandon TV series “Dil Dariya”, but due to some reasons, the series was released after a year, and during this time, Shah Rukh Khan worked in a TV serial named Fauji, thus his younger Arrival on the screen came from a serial called Fauji.

इसके बाद उन्होंने कई सारे सीरियल किये जैसे – सर्कस , वागले की दुनिया, इडियट और उम्मीद ,में काम किया। उस समय उनके अभिनय की तुलना महान दिलीप कुमार जी से की जाने लगी।

After this he did many serials like – Circus, Wagle Ki Duniya, Idiot and Ummeed. At that time, his performance was compared to the great Dilip Kumar ji.

फिर आया उनके जीवन एक बहुत ही सुखद पल जब 1991 में उन्होंने अपनी प्रेमिका गौरी से विवाह किया। गौरी और शाहरुख़ के बिच कई वर्षो से प्रेम सम्बन्ध था , गौरी हर बुरे समय में शाहरुख़ के साथ खड़ी रहीं, कभी उन्हें टूटने न दिया। परन्तु कई सारी रुकावटों और परेशानियों को झेलने के बाद उन दोनों का रिश्ता संभव हो पाया।

Then came a very happy moment in his life when he married his girlfriend Gauri in 1991. Gauri and Shahrukh had a love affair for many years, Gauri stood with Shahrukh in all the bad times, never let them break up. But after facing many obstacles and troubles, their relationship became possible.

उनका एक्टिंग करियर की शुरआत हुई ही थी की उन्हें एक और बड़ा सदमा लगा जब 1991 में उन्हों ने अपनी माँ को भी खो दिया। अपने इस दुःख से उभरने और खुद को साबित करने के लिए वे मुंबई के लिए निकल पड़े ,अपने किस्मत को आजमाने।

His acting career had just started when he got another big shock when in 1991 he lost his mother too. To get out of his misery and prove himself, he left for Mumbai to try his luck.

एक अनजान सहर मुंबई, जहाँ उन्हें  जानने वाला कोई नहीं था। उन दिनों शाहरुख़ को कभी कभी डायरेक्टर्स और प्रोडूसर्स के ऑफिस में सोना पड़ता था तो कभी कभी अपने दोस्तों के घर रुकना पड़ता था।

An unknown city Mumbai, where no one knew him. In those days, Shahrukh sometimes had to sleep in the office of directors and producers and sometimes had to stay at his friends’ house.

एक समय ऐसा भी था जब शाहरुख़ को, पैदल या बस में लटक कर अपने काम पर जाना पड़ता था। उस वक्त शाहरुख़ के हालात इतने बिगड़ गए थे , की उन्हें अपना कैमरा तक बेचना पड गया था। नौबत तो यहाँ तक आ गयी थी की शाहरुख़ के जेब में बस 20 रुपये ही पड़े थे। वो रात उनके लिए बहुत ही काठीन था। उस रात शाहरुख़ अपने शंघर्ष से इतने टूट और दुखी हो गये थे की उन्होंने अपने दोस्तों को यह तक कह डाला की , की इस सहर ने उन्हें इतने दर्द और मुसीबतें दी है , एक दिन ऐसा आएगा जिस दिन मै इस पुरे सहर पे राज करूँगा।

There was a time when Shah Rukh had to go to work on foot or in a bus. At that time, Shah rukh’s condition had deteriorated so much that he had to sell his camera. It had come so far that only 20 rupees were left in Shah rukh’s pocket. That night was very difficult for him. That night, Shah rukh khan was so upset and sad that he had told his friends that this city has given him so much pain and troubles, one day will come when I will rule this whole city.

कुछ समय के बाद उनके किस्मत ने भी उनका साथ दिया और उनकी एक्टिंग को देखते हुए उन्हें कई फिल्मों में काम करने का अवसर मिला । सबसे पहले उन्होंने हेमाँ मालिनी और धर्मेंद्र जी के पास अपना ऑडिशन दिया , उनके एक्टिंग से दोनों प्रभावित हुए और अंततः उन्हें हेमा मालिनी के डायरेक्शन में “दिल आशना है” नाम के फिल्म में काम करने का मौका मिला।

After some time his luck also supported him and seeing his acting, he got an opportunity to work in many films. He first gave his audition to Hema Malini and Dharmendra ji, both were impressed by his acting and eventually got a chance to work in a film titled “Dil Aashna Hai” under Hema Malini’s direction

लेकिन 1992 में आयी दीवाना मूवी शाहरुख़ खान की डेब्यू फिल्म बनी। दीवाना बॉलीवुड की एक हिट फिल्म साबित हुई। जिसने शाहरुख़ खान की फिल्मी सफर को एक अच्छी शुरुआत दी। शाहरुख़ खान को उनकी इस फिल्म के लिए, फिल्म फेयर का बेस्ट मेल डेब्यू पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

But the 1992 Deewana movie became Shahrukh Khan’s debut film. Deewana proved to be a Bollywood hit. Which gave Shahrukh Khan’s film journey a good start. Shahrukh Khan was awarded the Filmfare Best Male Debut Award for his film.

1993 में उन्होंने कुछ अलग प्रयास किया जो उनके स्वभाव से बिलकुल विपरीत था। उन्होंने डर और बाज़ीगर जैसी फिल्मों में काम किया जहाँ उन्होंने हीरो की जगह विलन का किरदार निभाया जिसे लोगों द्वारा खूब सराहा गया। बाज़ीगर में उनके दमदार विलन के अभिनय के लिए उनको फिल्म फेयर के सर्ब्वश्रेष्ठ अभिनय का पुरष्कार मिला। और इस तरह बॉलीवुड  में अपने 2 साल के छोटे से सफर में ही उन्होंने अपनी अभिनय के दम पर पूरी दुनिया में लोहा मनवाया।

In 1993, he tried something different which was completely contrary to his nature. He acted in films like Darr and Baazigar where he played the character of Villan in place of Hero which was well appreciated by the people. He was awarded the Best Actor at Filmfare for his strong villain performance in Baazigar. And in this way, in his short journey of 2 years in Bollywood, he showed his talent to the whole world on the basis of his acting.

दोस्तों अपने शुरुआती दौर में ही विलन का अभिनय करना ये किसी भी एक्टर के लिए आसान नहीं होता। अक्सर लोग इससे दूर ही रहना पसंद करते है। परन्तु शाहरुख़ खान उन सबसे बिलकुल विपरीत थे, और वे हर चुनौती भरे किरदार को करके लोगो के बिच प्रशिद्ध हो रहे थे।

Friends, it is not easy for any actor to act in villain’s role, in his early stages. Often people like to stay away from it. But Shah rukh Khan was the exact opposite of them, and he was getting famous between people by doing every challenging character.

फिर आयी 1995 में दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, और यही वो फिल्म थी जिसके बाद लोगो में शाहरुख़ खान की एक रोमांटिक छवि बन गयी। इस फिल्मने कुल 10 फिल्म फेयर पुरष्कार जीते थे। जिसमे शाहरुख़ खान को दूसरी बार बेस्ट एक्टर का अवार्ड मिला।

Dilwale Dulhania Le Jayenge
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Then came “Dilwale Dulhania Le Jayenge” in 1995, and it was the film after which that creates a romantic image of Shah rukh Khan. The film won a total of 10 Filmfare Awards. In which Shah rukh Khan received the Best Actor Award for the second time.

शाहरुख़ को 90 की दशक में किंग ऑफ़ रोमांस कहा जाने लगा ।

Shah rukh khan came to be called King of Romance in the 90s.

1998 में आयी कभी ख़ुशी कभी ग़म के लिए उन्हें फिर से फिल्म फेयर का बेस्ट एक्टर का अवार्ड मिला। और दोस्तों इसी तरह से शाहरुख़ ने कूल 14 फिल्म फेयर के पुरष्कार जीते है। आगे भी शाहरुख़ खान ने कई सारी फिल्मो में काम किया ।

He again won the Filmfare’s Best Actor Award in 1998 for Kabhi Khushi Kabhi Gham. And friends likewise Shahrukh has won 14 Filmfare awards. Shah Rukh Khan also worked in many films in the future.

उनकी कुछ बेहतरीन फ़िल्में इस प्रकार है-

देवदास , स्वदेश , वीर- ज़ारा , पहेली , चक दे इंडिया , डॉन , माय नेम इस खान, रावन , चेन्नई एक्सप्रेस आदि।  जहा इन्होने अपने भिन्न भिन्न किरदारों से हमे हसाया भी , रुलाया भी तथा देश के प्रति प्रेरित भी किया। और अपनी दमदार एक्टिंग का पुरे विश्व भर में लोहा मनवाया।

Some of his best films are as follows-

Devdass, Swadesh, Veer-Zara, Paheli, Chak De India, Don, My Name Is Khan, Ra-one, Chennai Express etc. Where he has made us laugh, cry and inspired us with his different characters. And made great impact of his powerful acting all over the world.

एक्टिंग के साथ साथ शाहरुख़ खान एक व्यापारी भी है , रेड चिल्लीज एंटरटेनमेंट प्रोडक्शन कंपनी के मालिक है, साथ ही साथ वे जूही चावला और उनके पति के साथ पार्टनरशिप में IPL की टीम कोलकाता नाईट राइडर्स के मालिक है।

Apart from acting, Shah Rukh Khan is a businessman, owner of Red Chillies Entertainment Production Company, as well as the owner of IPL team Kolkata Knight Riders in partnership with Juhi Chawla and her husband.

shahrukh khan
source – google

शाहरुख़ की कूल संपत्ति लगभग 5000 करोड़ के आस पास है , और वे दुनिया के सबसे आमिर एक्टर्स की सूचि में में दूसरे स्थान पे आते हैं।

Shah rukh’s total assets are around 5000 crores, and he comes second in the list of world’s most riches actors.

दोस्तों सफलता पाने के लिए बहुत कुछ खोना पड़ता है , और शाहरुख़ कोभी इसकी कीमत चुकानी पड़ी।

https://inspiretome.com/sundar-pichai/

Mahatma Gandhi- An Inspiration

Mahatma Gandhi- An Inspiration
Mahatma Gandhi- An Inspiration

महात्मा  गांधी (Mahatma Gandhi) एक ऐसा नाम है ही नहीं जिसे भारत ही नहीं कोई दुनिया में किसी भी परिचय की जरूरत नहीं है सत्य और अहिंसा के पुजारी इसमें बिना शस्त्र उठाए अंग्रेजों को झुका दिया और भारत को आजादी दिलाने में अहम किरदार निभाया।

महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) का जन्म 2 अक्टूबर को पोरबंदर काठियावाड़ एजेंसी, गुजरात में हुआ था। गाँधी जी का पूरा नाम मोहन दास करमचंद गाँधी था। गांधी जी के पिता का नाम करमचंद गांधी था जो कि राजकोट के दीवान थे और इनकी माता का नाम पुतलीबाई था । 30 जनवरी 1948 को गांधी जी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।

आज हम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi)  के जीवन से जुड़े चार सबसे प्रेरक प्रसंग को साझा करेंगे आइए जानते हैं –

1. पहला प्रेरक प्रसंग – अमूल्य दान

गांधीजी देशभर में भ्रमण कर चरखा संघ के लिए धन इकट्ठा कर रहे थे अपने दौरे के दौरान वह उड़ीसा में किसी सभा को संबोधित करने पहुंचे । उनके भाषण को खत्म होने के बाद एक गरीब महिला खड़ी हुई और गांधीजी के समीप आई । वह बहुत गरीब थी मैले फटे हुए कपड़े और कमर से झुक कर चल रही थी, किसी तरह वह भीड़ से होते हुए गांधी जी के पास पहुंची । वह आग्रह करने लगी कि उसे गांधीजी के पास पहुंचना है और उन्हें देखने की अभिलाषी है।

किसी भी तरह वह उनके पास पहुंची और पहुंचकर उनके पैर छुए उसने अपनी साड़ी के पल्लू से बंधे हुए एक तांबे के सिक्के को निकाला और गांधी जी के चरणों में रख दिया । गांधीजी ने सावधानी से उस सिक्के को उठाया और अपने पास रख लिया, उस समय चरखा संघ के कोष जमुनालाल वाला जी संभाल रहे थे, उन्होंने गांधीजी से वह सिक्का मांगा परंतु गांधी जी ने सिक्के को उन्हें देने से मना कर दिया । यह देखकर जमुनालाल जी अचंभित रह गए, अचंभे से भरे हुए जमुनालाल ने गांधी जी से कहा कि वे चरखा संघ के सारे कोष और चेक संभालता हु, परंतु आप इस ताम्बे के सिक्के को मुझे क्यों नहीं सौंप रहे? क्या आपको मुझ पर भरोसा नहीं??

गांधीजी ने मुस्कुराते हुए कहा यह तांबे का सिक्का उन हजारों से कहीं ज्यादा कीमती है, मूल्यवान है । गांधी जी ने कहा यदि किसी के पास लाखों है और वह 1000-2000 रुपये दे देता है तो उसे उस दान से कोई फर्क नहीं पड़ेगा ,परंतु यह सिक्का शायद उस गरीब महिला के पूरे जीवन की जमा पूंजी थी और उसने अपना पूरा संसार दान दे दिया है । कितनी उदारता दिखाई है उस महिला ने, कितना बड़ा बलिदान दिया है, इसलिए इस तांबे के सिक्के का मूल्य मेरे लिए एक करोड़ से भी अधिक है ।

2. दूसरा प्रसंग – डर का सामना

यह प्रसंग गांधीजी के बचपन से जुड़ी हुई है जिसने गांधी जी के पूरे जीवन को बदल दिया।

रात  बड़ी काली थी और मोहन बड़े डरे हुए थे। हमेशा से ही उन्हें भूतों से डर लगता था, वह जब भी अंधेरे में अकेले होते थे उन्हें लगता था कि कोई भूत उनके  आस-पास है, और कभी भी उन पर झपट पड़ेगा। वह रात इतनी काली थी की कुछ भी स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रहा था, ऐसे में मोहन को एक कमरे से दूसरे कमरे में जाना था। वह हिम्मत करके कमरे से निकले और उनका दिल जोर जोर से धड़क रहा था और चेहरे पर डर का भाव था।

वही घर में काम करने वाली रंभा दरवाजे के पीछे खड़ी सब कुछ बड़े गौर से देख रही थी फिर उसने हंसते हुए पूछा-

क्या हुआ बेटा ?

मोहन ने उत्तर देते हुए कहा कि उन्हें डर लग रहा है

इस बात पर रंभा ने उन्हें पूछा डर ?? किस बात का डर??

मोहन ने सहमते हुए बोला देखिए कितना अंधेरा है, मुझे भूतों से डर लगता है।

रंभा ने प्यार से गांधी जी के सर को सहलाते हुए कहा –

“जो कोई भी अंधेरे से डरता है वह मेरी बात सुने, श्री राम जी के बारे में सोचो और कोई भी हो तुम्हारे पास आने की कभी हिम्मत नहीं करेगा, कोई तुम्हारा सर का बाल तक छू नहीं पाएगा। श्री राम जी हमेशा तुम्हारी रक्षा करेंगे।”

रंभा के इन शब्दों ने बालक मोहन को हिम्मत दी , राम नाम लेते हुए गांधी जी अपने कमरे से निकले और उस दिन के बाद मोहन कभी भी खुद को अकेला नहीं समझा और कभी भयभीत भी नहीं हुए। अब उनको विश्वास हो चुका था कि जब तक श्री राम उनके साथ है, उन्हें किसी से डरने की कोई जरूरत नहीं है।

उनके इस विश्वास ने गाँधी जी को जीवन भर सकती दी और मरते वक्त भी उनके मुंह से राम नाम ही निकला।

3.तीसरा प्रसंग – संयम का महत्व

यह बात 1962 की है। गांधी जी (Mahatma Gandhi) दक्षिण भारत की यात्रा पर थे। उनके साथ अन्य सहयोगियों के अलावा काकासाहेब कालेलकर भी थे। वे सुदूर दक्षिण में नागर-कोइल पहुंचे। वहां से कन्याकुमारी काफ़ी पास है। इस दौरे के पहले के किसी दौरे में गांधी जी कन्याकुमारी हो आए थे। वहां के मनोरम दृष्य ने उन्हें काफ़ी प्रभावित किया था। गांधी जहां ठहरे थे, उस घर के गृह-स्वामी को बुलाकर उन्होंने कहा, “काका को मैं कन्याकुमारी भेजना चाहता हूं। उनके लिए मोटर का प्रबंध कर दीजिए।”

कुछ देर के बाद उन्होंने देखा कि काकासाहेब अभी तक घर में ही बैठे हैं, तो उन्होंने गृहस्वामी को बुलाया और पूछा, “काका के जाने का प्रबंध हुआ या नहीं?”

किसी को काम सौंपने के बाद उसके बारे में दर्याफ़्त करते रहना बापू की आदत में शुमार नहीं था। फिर भी उन्होंने ऐसा किया। यह स्पष्ट कर रहा था कि कन्याकुमारी से गांधी जी काफ़ी प्रभावित थे। स्वामी विवेकानन्द भी वहां जाकर भावावेश में आ गए थे और समुद्र में कूद कर कुछ दूर के एक बड़े पत्थर तक तैरते गए थे।

काकासाहेब ने बापू से पूछा, “आप भी आएंगे न?”

बापू ने कहा, “बार-बार जाना मेरे नसीब में नहीं है। एक दफ़ा हो आया इतना ही काफ़ी है।”

इस जवाब से काकासाहेब को दु:ख हुआ। वे चाहते थे कि बापू भी साथ जाएं। बापू ने काकासाहेब को नाराज देख कर गंभीरता से कहा, “देखो, इतना बड़ा आंदोलन लिए बैठा हूं। हज़ारों स्वयंसेवक देश के कार्य में लगे हुए हैं। अगर मैं रमणीय दृश्य देखने का लोभ संवरण न कर सकूं, तो सबके सब स्वयंसेवक मेरा ही अनुकरण करने लगेंगे। अब हिसाब लगाओ कि इस तरह कितने लोगों की सेवा से देश वंचित होगा? मेरे लिए संयम रखना ही अच्छा है।”

4. चौथा प्रसंग – आशावादी महात्मा गाँधी

कोलकाता में हिंदू मुस्लिम दंगे भड़के हुए थे काफी प्रयासों के बाद भी लोग शांत नहीं हो रहे थे। दंगों की चपेट में कई लोग आ चुके थे, ऐसे में गांधीजी वहां पहुंचे और अपने एक मित्र के पास ठहरे। उनके पहुंचने के बाद दंगा कुछ शांत हुआ, लेकिन कुछ ही दिनों के बाद फिर से आग भड़क उठी यह देख गांधी जी (Mahatma Gandhi) बड़े दुखी हुए और उन्होंने आमरण अनशन करने का निर्णय लिय लिया, और 31 अगस्त 1947 को अनशन पर बैठ गए।

उसी दौरान एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति उनके पास आया और बड़े ग्लानि के साथ बोला मैं तुम्हारी मृत्यु का पाप अपने सर नहीं लेना चाहता, लो रोटी खा लो और अचानक ही वह फूट-फूट कर रोने लगा और कहने लगा मैं मरूंगा तो तो नर्क जाऊंगा।

क्यों?? गांधीजी ने बड़ी विनम्रता से पूछा

व्यक्ति बोला –  क्योंकि मैंने एक 8 साल के मुस्लिम लड़के की जान ली है।

गांधीजी ने पूछा तुमने उसे क्यों मारा??

व्यक्ति बोला क्योंकि मुसलमानों ने मेरे मासूम बच्चे को जान से मार दिया उसने यह रोते हुए बोला।

गांधीजी ने कुछ देर सोचा और फिर बोले मेरे पास एक उपाय है !!!

व्यक्ति बड़े आश्चर्य से उनकी तरफ देखने लगा

गाँधी जी बोले –

ठीक उसी उम्र का एक लड़का खोजो जिसने दंगों में अपने मां-बाप को खोया है, और उसे अपने बच्चे की तरह पालो, परंतु एक चीज सुनिश्चित कर लो वहां एक मुस्लिम होना चाहिए और उसी तरह बड़ा किया जाना चाहिए और यह कहकर गांधीजी ने अपनी बात मुस्कुराते हुए खत्म की।

दोस्तों कुछ तो जवाब होते हैं और कुछ जवाब लाजवाब होते हैं, महात्मा गांधी उनका जीवन और उनका विचार भी कुछ इसी तरह ही है। वह कहने से ज्यादा करने में विश्वास करते थे, उन्होंने सत्य के साथ प्रयोग करते हुए खुद को संवारा। अँधेरे और भूतों से डरने वाला बालक मोहन, ब्रिटिश साम्राज्य की सत्ता को झकझोरने वाली एक ऐसी शक्ति बना जिसके आगे अंग्रेज लाचार दिखे।

हथियारों का सामना किया जा सकता है, हिंसा को खत्म किया जा सकता है लेकिन अहिंसा की ताकत का एहसास भगवान महावीर के बाद महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) ने ही दिलाया , वह मानते थे कि अंधेरे से लड़ने के बजाय रोशनी फैलानी चाहिए, अंधेरा खुद ही खत्म हो जाएगा।

दोस्तों ये थी महात्मा गाँधी के जीवन से जुडी कुछ प्रेरक प्रसंग। आशा करता हु आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा।

धन्यवाद !!!

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Top Ten Protein Foods

Top Ten Protein Foods

Top Ten Protein Foods
Top Ten Protein Foods

आमतौर पर हर रोज एक सामान्य व्यक्ति को 2500 कैलोरीज और 56 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है और महिलाओं को 2000 कैलोरीज और 46 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है लेकिन हम सभी लोगों को ऐसी कौन सी चीज  खानी चाहिए जिससे कि हमें भरपूर प्रोटीन भी मिल सके और एनर्जी भी। आज हम आपको ऐसे ही 10 फूड के बारे में बताएंगे जिसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन होता है (Top Ten Protein Foods)

Some Important Facts & Knowledge about protein foods

 आज हम आपको ऐसे ही 10 फूड Top Ten Protein Foods के बारे में बताएंगे जिसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन होता है लेकिन उससे पहले आपको कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना पड़ेगा जिसके अनुसार आप तय करेंगे कि आपकी बॉडी के लिए कितने प्रोटीन की आवश्यकता है और आपका बीएमआई BMI यानी बॉडी मास इंडेक्स (BODY MASS INDEX)  क्या है,  प्रोटीन की आवश्यकता हमें बॉडी बनाने के लिए होती है क्योंकि हमारी जो शरीर की टिशूज  हैं वह प्रोटीन से बने होते हैं, इस लिए शरीर की विकास के लिए प्रोटीन की आवश्यकता होती है ।

हमारे बॉडी को कितनी प्रोटीन की आवश्यकता है यह आप खुद ही पता कर सकते हैं अपने शरीर के वजन को 0.8 से गुणा करें जो भी वैल्यू आती है उतना ही रोज की प्रोटीन की आवश्यकता होती है,  आपको बीएमआई चेक करनी चाहिए इससे आपको पता चलता है कि आपके शरीर को वसा (FAT) की ज्यादा जरूरत है या प्रोटीन की।

 यह कैलकुलेट करना आप बहुत ही सरल है आप  गूगल (GOOGLE) पर अपना बीएमआई कैलकुलेट कर सकते हैं ।

बीएमआई रेट कुछ इस प्रकार होती है , 18.5 पॉइंट  से 25 तक रैंक वालों को सामान्य श्रेणी में रखी जाती है,  जिसका बीएमआई BMI 18.5 से कम होता है उसे अंडरवेट  UNDER WEIGHT माना जाता है

जिनका बीएमआई 18.5 है या कम उन्हें  आज से ही फैट वाली चीजें खानी शुरू कर देनी चाहिए और जिनका बीएमआई रेट 25 से 30 हो जाता है उन्हें Over Weight माना जाता है और उन्हें फैट वाली चीजें नहीं खानी चाहिए या इनका सेवन कम कर देना चाहिए , और जिनका बीएमआई रेट 30 से ऊपर है वह दरअसल मोटापे के शिकार हो चुके हैं,  यह उनके लिए बहुत ही चिंता का विषय है । इसे आज ही और अभी से ही फैट वाले भजन  खाना बंद कर देना चाहिए , और जिनका बीएमआई 18.5 से 25 के बीच में है वे लोग Normal कैटेगरी में आते हैं इन्हें नियमित रूप से संतुलित आहार और प्रोटीन का सेवन करना चाहिए।

Benefits of protein

एक नए शोध के अनुसार यह बात सामने आई है कि शरीर के लिये प्रोटीन सबसे आवश्‍यक तत्‍व है। प्रोटीन त्वचा, रक्त, मांसपेशियों तथा हड्डियों की कोशिकाओं के विकास के लिए आवश्यक होते हैं।

आइए अब हम 10 सबसे बेहतरीन प्रोटीन (Top Ten Protein Foods) वाले भजनों के बारे में बात करेंगे इनमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन होती है

Top Ten Protein Foods

1.Normal milk or Soya milk

Normal milk or Soya milk - Top Ten Protein Foods
Normal milk or Soya milk – Top Ten Protein Foods

न केवल कैल्शियम, बल्कि दूध प्रोटीन से भी भरपूर होता है. दूध उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन का उत्कृष्ट स्रोत हो सकता है. इसके अलावा, एक गिलास दूध शाम के लिए परफेक्‍ट ब्रेकफास्‍ट कहा जा सकता है, जो आपका पेट लम्‍बे समय तक भरा रखता है।

इन दोनों में ही बराबर मात्रा में प्रोटीन होता है,  प्रति 100 ग्राम दूध में 3.5 ग्राम प्रोटीन मिल जाती है यानी अगर आप प्रतिदिन 1 लीटर दूध का सेवन करते हैं तो आपको लगभग 34 ग्राम प्रोटीन मिल जाती है प्रोटीन के साथ साथ दूध में कैल्शियम  और वसा  पाया जाता है जो अंडरवेट लोगों के लिए अति आवश्यक है।

2.Eggs

Eggs - Top Ten Protein Foods
Eggs – Top Ten Protein Foods

सामान्य तर एक अंडे में 5- 6 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है लेकिन अंडे की ऊपरी हिस्से यानी सफेद भाग  में सबसे ज्यादा प्रोटीन पाया जाता है लगभग 75% और अंडे की अंदरूनी हिस्से में सबसे ज्यादा फैट पाया जाता है , 25 से ज्यादा बीएमआई bmi  वालों को ऊपर वाला हिस्सा  खाना  चाहिए और 18.5 से कम   वालों को अंडे का दोनों ही हिस्सा खाना चाहिए ताकि उसे fat  के साथ साथ प्रोटीन भी मिल सके ।

3.Fish

Fish - Top Ten Protein Foods
Fish – Top Ten Protein Foods

100 ग्राम फिश से आपको 22 ग्राम प्रोटीन मिलती है और 206 कैलोरीज एनर्जी भी मिल जाती है इसमें भी भरपूर मात्रा में वशा पाई जाती है, 100 ग्राम फिश से आपको 15 ग्राम वसा fat भी मिल जाता है जोकि जो कि किसी अंडर वेट व्यक्ति के लिए बहुत ही लाभदायक ह ।

4.Greek yoghurt

Greek yoghurt - Top Ten Protein Foods
Greek yoghurt – Top Ten Protein Foods

आजकल हर कोई जिम जाता है और वर्कआउट के बाद प्रोटीन (protien) की बहुत जरुरत होती है। ग्रीक योगर्ट में अधिक मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है, वर्कआउट के बाद इसे शहद और केले के साथ खाने से बहुत प्रोटीन मिलता है। इसमे अमीनो एसिड होता है जो वर्कआउट में हुए दर्द को दूर करता है। यह मास्पेशिओं के लिए भी बहुत फायदेमंद है। इसमें साधारण दही के मुकाबले लगभग दोगुना प्रोटीन होता है। एक कप ग्रीक योगर्ट में लगभग 25 ग्राम और एक कप साधारण योगर्ट में लगभग 13 ग्राम प्रोटीन होता है।

5.Chicken

Chicken - Top Ten Protein Foods
Chicken – Top Ten Protein Foods

100 ग्राम चिकन में प्रोटीन की मात्रा 31g के लगभग होती है. 100 ग्राम चिकन या 200 से 250 ग्राम चिकन का Use हमे रोजाना करना चाहिए. प्रोटीन की जरूरत को पूरा करने के आप अपने आहार में इसको शामिल कर सकते है. यह आपकी प्रोटीन की जरूरत को पूरा करता है साथ ही यह और कई पोषक तत्वों की पूर्ति को पूरा कर देता है, चिकन हड्डियों को मजबूत बनाने में बहुत ही अच्छा आहार माना गया है. इसमें फास्फोरस अच्छा होता है जो की कैल्शियम के साथ मिलकर हमारी हड्डियों को मजबूत बनाता है ।

6.NutsAlmonds

Nuts- Almonds - Top Ten Protein Foods
Nuts- Almonds – Top Ten Protein Foods

बादाम प्रोटीन का एक समृद्ध स्रोत, बादाम एक हेल्‍दी फूड होने के साथ-साथ वजन घटाने में कारगर साबित हो सकते हैं. बादाम me प्रोटीन ke alawa  फाइबर, और हेल्दी फैट से भरपूर होता है जो आपको ओवर इटिंग से रोकता है यानी इन्हें खाने से आपको छोटी-छोटी भूख नहीं लगती. अगर आपको वज़न कंट्रोल में रखना है तो रोज़ाना एक मुठ्ठी बादाम खाएं. बादाम में पौटेशियम की मात्रा काफी अधिक होती है और साथ ही सोडियम भी काफी कम मात्रा में होता है। इससे हमारे शरीर में रक्‍त संचार सुचारू बना रहता है। स्‍मरण शक्ति को अच्‍छा बनाये रखने के लिए बादाम को काफी उपयोगी माना जाता है।

100 ग्राम बादाम में

Protein की मात्रा  – 21g

Calories की मात्रा – 576
Fat की मात्रा – 49g
Saturated fat की मात्रा – 3.7g
Sodium की मात्रा – 1mg
Potassium की मात्रा – 705mg
Carbs की मात्रा – 22g
Fiber की मात्रा – 12g
Sugar की मात्रा – 3.9g


7.Oats

Oats - Top Ten Protein Foods
Oats – Top Ten Protein Foods

हम अक्सर सुनते हैं कि सुबह नाश्ते में ओट्स खाना सेहत के लिए फायदेमंद होता है। इससे पेट भी भर जाता है और हमें काम करने के लिए पर्याप्त एनर्जी भी मिल जाती है। माना जाता है कि ओट्स को पानी की बजाय दूध में पकाकर खाने से हमें प्रोटीन भी मिलता है।

100 ग्राम ओट्स में

 Calories की मात्रा 389

Water की मात्रा 8%

Proteinकी मात्रा 16.9 ग्राम

Carbs की मात्रा 66.3 जी

Fibre की मात्रा 10.6 ग्राम

Fat6.9 ग्राम

8. Red Meat

Red Meat- high Protein Foods
Red Meat- high Protein Foods

 रेड मीट उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन का अच्छा स्रोत है। प्रोटीन शरीर के विकास, रखरखाव और मरम्मत के लिए आवश्यक है और ऊर्जा भी प्रदान कर सकता है। रेड मीट में औसतन 20-24 ग्राम प्रोटीन प्रति 100 ग्राम (जब कच्चा होता है) होता है। पके हुए लाल मांस में प्रति 100 ग्राम (पकाया हुआ वजन) 27-35 ग्राम प्रोटीन होता है।

Energy (kcal) की मात्रा                       213 ग्राम

Protein (g) की मात्रा                            29.2 ग्राम

Fat (g) की मात्रा                                  10.7 ग्राम

Saturates (g)  की मात्रा                        4.9 ग्राम

Monosaturates (g) की मात्रा                4.0 ग्राम

Polyunsaturates की मात्रा                    0.6 ग्राम  

Vitamin B12 (μg) की मात्रा                  3.0 ग्राम

Iron (mg)                              2.1 ग्राम

Zinc (mg)                             3.6 ग्राम

9.Soya daal

Soya daal- Protein rich Foods
Soya daal- Protein rich Foods

दालों के बीच सोयाबीन पौष्टिक रूप से सबसे समृद्ध है। इसमें लगभग 40% प्रोटीन, 20% वसा और 4% खनिज होते हैं।

• इसके प्रोटीन में अन्य दाल की तुलना में अधिक पोषक मूल्य होता है।

• इसमें लोहे की उच्च सामग्री है।

• यह कैरोटीन, लाइसिन और फोलिक एसिड में समृद्ध है।

100 ग्राम soya dal  में

Protein की मात्रा 43.2 ग्राम
Fat content की मात्रा 19.5 ग्राम
Calories की मात्रा 432

10.Tofu

Tofu-Top Ten Protein rich Foods
Tofu-Top Ten Protein rich Foods

टोफू प्रोटीन का एक बेहतरीन स्रोत है। सिर्फ आधे कप टोफू से हमें 10 ग्राम प्रोटीन मिलता है। इतना ही नहीं इस 10 ग्राम प्रोटीन में 88 कैलोरी एनर्जी होती है। यह एनर्जी बिना  त्वचा वाले एक चिकन से सिर्फ 45 कैलोरी कम होती है। इसलिए टोफू को इतना फायदेमंद माना जाता है। साथ ही टोफू में जिंक, आयरन, सेलेनियम, पौटेशियम और अन्य कई विटामिन और मिनरल्स भी पाए जाते हैं।

आशा करता हु आपको यह आर्टिकल Top Ten Protein Foods पसंद आया होगा।

धन्यवाद !!!

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