Anand Kumar super 30

Super 30 – An Inspiration Story of Anand Kumar

Anant kumar super 30 taking the class for
first batch, 1992.
Anand Kumar taking the class for
first batch, 1992.  
Picture credits : Super30.org

आज का लेख एक छोटे से गाँव में रहने वाले गणतिज्ञ आनंद कुमार (Anand kumar) Super 30 जी के बारे में है जिन्होंने पुरे विश्वमें भारत का नाम गर्व से ऊंचा कर दिया।

दोस्तों जैसा की आप सब जानते है भारत एक ऐसा देश रहा है जोसदियोंसे एक सेबढ़ कर एक महान पुरुषो को जन्म देता रहा है ।भारत देश ज्ञान भूमि के रूपसे भी जाना जाता है जिसने अपनी ज्ञान की गंगा से पुरे विश्व को प्रकाशित किया है तथा नए अविष्कारों की ओ रले कर गया है। भारत वर्ष ने आर्यभट्ट, रामानुजन, शुश्रुत आदि जैसे महान पुरुषों को जन्मदिया है जिन्होंने अपने ज्ञान तथा अविष्कारों से पुरे विश्व को तृप्तकिया है।

आज हम ऐसे ही एक आधुनिक युग के कर्मयोगी के बारे में जानने वाले है जिनका योगदान हमारे समाज के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ है। खास कर के गरीब घर के बच्चो के शिक्षा के लिए। वह ग़रीब बच्चे जो पैसो के आभाव में जरुरी शिक्षा से वंचित रह जाते है जिस कारण समाज और देश भी एक अनमोल प्रतिभा  से वंचित रह जाता है।

आनंद कुमार (Anand kumar) Super 30 का जन्म 1 जनवरी 1973 में बिहार के पटना शहर में हुआ।

उनके पिता का नाम राजेंद्र प्रसाद और माता का नाम जयंती देवी था। आनंद जी ने एक अनुसूचित जाति (Schedule Caste) परिवार में जन्म लिया था जिसे भारत में एक छोटी जाति माना जाता है और उनके साथ भेद-भाव किया जाता था ।

आनंद जी (Anand kumar) Super 30 के पिता डाक विभाग (Indian Post) में एक क्लर्क थे और गरीब होने कारण वे आनंद जी (Anand kumar) को प्राइवेट स्कूल में नहीं पढ़ा सके क्योंकि आनंद जी (Anand kumar) Super 30 के पिता उनका खर्चा उठाने में असमर्थ थे जिस कारण आनंद जी ने सरकारी विद्यालय के हिंदी माध्यम में दाख़िला लिया जहाँ आनंद जी की विषय गणित में रूचि बढ़ने लगी।

आनंद जी को गणित (Mathematics) में अत्यधिक लगाव हुआ और भविष्य में गणित उन के  जीवन  का  एक  अहम हिस्सा बन गई जिसने पुरे विश्व भर में नए कीर्तिमान कायम किये ।गणित (Mathematics) के  प्रति आनंद जी का रुझान इतना था की वे   अपने मष्तिस्क में गणित के कई सूत्र (फार्मूला) बना लेते थे। गणित में उनके योगदान के लिए कई राष्टीय तथा अंतराष्टीय पुरष्कारो से सम्मानित भी किया गया।

स्नातक शिक्षा के दौरान उन्होंने संख्या सिद्धांत पर कुछ ऐसे पेपर जमा कर उन्हें हल किया जो पहले कोई नहीं कर पाया था, कुछ ऐसे अनसुलझे समीकरणों(Equation) को सुलझाया जिसे आज तक कोई नहीं सुलझा पाया ।

उनके इन्हीं कार्यो को अंतर्राष्ट्रीय मैग्ज़ीन(International Magzine) ‘‘मैथमेटिकलस्पेक्ट्रम’’ (Mathematical Spectrum) और‘ ‘द मैथमेटिकलगज़ट’’(The Mathematical Gazette) में प्रकाशति किया गया। जिसके बाद आनंद जी को प्रख्यात “कैंब्रिज विश्वविद्यालय”(Cambridge University) में दाखिल सुरक्षित हुआ ।

परन्तु किस्मत को कुछ और ही मंजूर था इंग्लैंड जाने के लिए आनंद जी (Anand Kumar) के पास पर्याप्त पैसे नहीं थे उनके पिताजी ने बहुत कोशिश की परन्तु वे पर्याप्त धन जुटाने में असफल रहे जिसके कारण वश उनके पिता की तबीयत बिगड़ने लगी और उनकी मृत्यु हो गई।

पिता की मृत्यु के बाद अब घर की आर्थिक स्तिथि खराब होने लगी थी और जिसके कारण वे “कैंब्रिज विश्वविद्यालय” में दाखिला न ले सके। आर्थिक स्तिथि खराब होने के कारण उन्हें बहुत मुश्किलें झेलनी पड़ी लेकिन वे हिम्मत नहीं हारे।

घर की आर्थिक स्थिति के लिए आनंद जी ने अपने भाई और माँ के साथ मिलकर पापड़ बनाने का काम शुरू किया जिससे कुछ आमदनी हो सके। भाई प्रणव का भी अहम् और महत्वपूर्ण योगदान रहा है, आनंद कुमार के साथ वे भी अपने माँ के साथ पापड़ बनाने और बेचने में बराबर का योगदान दिया करते थे।

इन सबके बावजूद भी आनंद जी ने गणित पर अपना काम जारी रखा वह सुबह गणित पढ़ने के बाद तपती धूप में पापड़ बेचने के लिए निकल जाया करते थे।

आनंद जी के इस संघर्ष के दौरान उन्होंने बच्चो को गणित(Mathematics) पढ़ना शुरू किया जिससे उनकी थोड़ी-बहुत आमदनी हो जाती थी। इस बीच 1992 में उन्होंने एक कमरा किराये पर लिया जिसका किराया 500 रूपये था और अपने संस्थान “रामानुजन स्कूल ऑफ़ मैथमेटिक्स” (Ramanujan School of Mathematics) की स्थापना की जहाँ वह बहुत कम फीस पर बच्चों को विभिन्न प्रतिस्पर्धा(Competitive Examinations) के लिए पढ़ाया करते थे ।

संस्थान में प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी आनंद जी के भाई प्रणब ने अपने कंधे पे उठा रखी थी जैसे :- पढ़ने,खाने तथा रहने आदि, प्रणब के योगदान के कारण आनंद कुमार इतने सफल हुए। उनकी क्लास दो बच्चों के साथ शुरू हुई और धीरे-धीरे इनकी लोकप्रियता बढ़ने लगी जो बाद में बढ़कर 36 बच्चों की क्लास बन गई और तीसरे वर्ष 500 तक पहुंचगयी।

यह वो दौर था जहाँ शिक्षा पैसे कमाने का धंधा बनते जा रही थी और लोग IIT जैसे बहु प्रतिष्ठित संस्थाओँ में दाखिले के लिए लाखो रुपए खर्च कर देते थे, आनंद जी चाहते तो वे भी ऐसा कर सकते थे और एक आराम की जिंदगी बिता सकते थे परन्तु उन्हें उस दर्द का एहसास था, जिन हालातों से वह जूझ चुके थे। आनंद जी नहीं चाहते थे की गरीब बच्चे उस दौर से गुजरे और जरुरी शिक्षा से वंचित रह जाये यही बात आनंद जी को औरो से अलग और श्रेष्ठ बनतीबनाती थी।

फ्री कोचिंग के लिए बच्चों को एंट्रेंस एग्जाम सेहो कर गुज़रना पड़ता था उसके बाद ही आनंद कुमार उन्हें अपने संस्था में पढ़तेथे। आनंदजी के पास बच्चे बहुतथे पढ़ने के लिए परन्तु पैसे और संसाधनों की कमी भी होने लगी थी।

साल 2002 की शुरुआत में आनंद जी के पास एक बच्चा आया और उसने IIT में पढ़ने के लिए एंट्रेंस JEE के लिए कहा परन्तु वह फ़ीस देने में असमर्थ था जिसके बाद आनंद जी ने सुपर 30 (Super 30) प्रोग्राम बनाया जिसमे वह हर साल 30 सबसे होनहार बच्चों को IIT के लिए तैयार करने लगे।

2002 में आनंद जी (Anand Kumar) द्वारा शुरू किया गया सुपर 30 (Super 30) प्रोग्राम दुनिया भर में प्रसिद्ध हो गया। यह वो 30 बच्चों का समूह था जो IIT कोचिंग की महंगी फीस देने में असमर्थ थे परन्तु वे बहुत ही प्रतिभावान थे जिन्हे आनंद जी ने पहचाना उन्हें तराशा, दिशादिखाई, ज्ञान दिया और काबिल बनाया, वे उन बच्चो की सम्पूर्ण रूप देखभाल करते थे उन्हें पढ़ने के लिए किताबें, भोजन और रहने के लिए जगह दिया करते थे।

आनंद जी को इस मुहीम को रोकने के लिए बहुत प्रेरित किया गया, प्रलोभन दिए गए, डराया गया, और कई जान लेवा हमले किये गए परन्तु वे इन सबसे विचलित नहीं हुए और अपने दृढ संकल्प व साहस के साथ डटे रहे अपने कर्तव्य मार्ग पर।

आनंद जी बड़ी मेहनत के साथ बच्चो को पढ़ाया करते थे। इनकी सफलता और प्रसिद्ध होने के बाद उन्हें सरकार का समर्थन मिला, कई विज्ञापन संस्थओं द्वारा इन्हे विज्ञापन का अवसर दिया गया परन्तु आनंद जी ने हमेशा उन अवसरों को नकार दिया, अपने कर्तव्य का पालन करते रहे और लोगो को प्रेरित करते रहे।

सुपर30 (Super30) अब देश के साथ विदेशो में भी नाम कमा रही थी,  आनंद की इस मुहिम द्वारा विदेशो में भी आनंद जी को सम्मानित किया गया और इनसे बहुत प्रेरित हुए। यह देख वे और भी ज्यादा प्रोत्साहित हुए और लोक कल्याण के कार्यो में खुद को समर्पित किया। सुपर30 (Super30) में लगभग 28 से 30 बच्चों का चयन IIT  में होता आया है जो खुद में ही किसी चमत्कार से कम नहीं है।

साल 2008-2010 के बीच आनंद जी के सभी 30 बच्चों का सिलेक्शन IIT में हुआ। सुपर 30  प्रोग्राम अब लोगो के लिए एक मिसाल बन गया है। जिस पर कई सारी डॉक्यूमेंट्री फिल्म के साथ-साथ 2019 में प्रदर्शित सुपर 30 हिंदी फिल्म (super 30 movie) भी बन चुकी है जिसमे “ह्रितिकरोशन”(Hritik Roshan) द्वारा अभिनय और “विकासबहल”(Vikas Bahl) द्वारा निर्देशित की गई है।

2016 में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी (Chief Minister of Bihar Nitish Kumar) ने आनंद जी पर लिखी गई जीवनी को जारी किया और कहा कि अब आनंद जी बिहार का एक प्रमुख चेहरा बन गये है। उनकी जीवनी का लेखन कनाडा में रहने वाले मनोचिकित्सक बीजु मैथ्यू (Psychiatrist Biju Mathew) ने अरुण कुमार(Arun Kumar) के साथ मिलकर किया जिसे पेंगुइन रैंडम हॉउस (Penguin Random House) ने अंग्रेजी में प्रकाशित किया व बाद में प्रभात प्रकाशन द्वारा हिंदी में प्रकाशित किया गया।

आनंद कुमार (Anand Kumar) Super 30 के जीवन की उपलब्धियाँ और सम्मान।

  • वर्ष 2009 में आनंद कुमार पर प्रस्तुत एक डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म(Documentry Film) डिस्कवरी चैनल (Discovery Channel) द्वारा बनाई गईं जिसके बाद आनंद कुमार जी को विदेशो में भी सराहा जाने लगा।
  • आनंद कुमार के सुपर 30 प्रोग्राम और लोक कल्याण से जापान(Japan) की अभिनेत्री “नोरिका फुजिवारा” (Norika Fujiwara) इतनी प्रभावित हुई की वह खुद बिहार के पटना में उनके अनुभवों को जानने के लिए आई।
  • आनंद जीको राष्ट्रपति रामनाथकोविंद द्वारा “राष्ट्रीय बाल कल्याण पुरस्कार” से सम्मानित किया गया ।
  • वर्ष 2010 में आनंद कुमार जी को बिहार के सबसे बड़े पुरस्कार “मौलाना अबुल कलाम आज़ाद शिक्षा पुरस्कार” से पुरस्कारित किया गया।
  • वर्ष 2010 में आनंदजी को IRDS (The Institute for Research and Documentation in Social Services) द्वारा स. रामानुजन अवार्ड से पुरस्कारित किया गया।
  • आनंद जी को अपने अनुभवों के बारे में बात करने के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ़ ब्रिटिश कोलंबिया (University of British Columbia), टोक्योयूनिवर्सिटी(Tokyo University), स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी (Stanford University), हार्वर्डयूनिवर्सिटी (Harvard University),मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नॉलजी (Massachusetts Institute of Technology) में आमंत्रित किया गया था।

Read about the Inspirational Journey of the great Shaheed Bhagat Singh

Inspirational shlok from shrimad Bhagwat Geeta

11 Most Inspirational Quotes of Dr. A. P. J. Abdul Kalam

The inspirational writer of Harry Potter Series JK Rowling

Read about the importance of Diwali : Ray of positiveness

Diwali

Diwali : Ray of Positiveness | दिवाली : सकारात्मकता की किरण।

Diwali 2019
Diwali : diya decoration

भारतवर्ष सदियों से अपनी परंपरा सभ्यता और संस्कृति से पहचाना जाता रहा है और भविष्य में भी हमेशा पहचाना जाएगा। इसी तरह भारतवर्ष के त्योहारों (festivals) का भी सबसे बड़ा योगदान रहा है जो संपूर्ण भारत (India) को एकजुट होकर उन्हें मनाने का अवसर प्रदान करता है, भारत में हर त्यौहार को मनाने के पीछे एक कहानी के साथ-साथ उससे जुड़ी सकारात्मक भावना है जो संपूर्ण भारत को बुराई पर अच्छाई की विजय गाथा का ज्ञान कराती है, जहां हर त्योहार का अपना आप अलग ही महत्व होता है दिवाली (Diwali) भी भारतवर्ष का सबसे बड़ा त्यौहार है जिसे संपूर्ण भारत मिलजुल कर सदियों से अलग-अलग तरीकों से मनाता रहा है ।

दिवाली (Diwali) को दीपावली ( deepavali  ) भी कहा जाता है जहा दीपावली (deepavali ) का अर्थ दीपो की पंक्ति (Diyas) से है। हिंदू सभ्यता में मोगली दीपावली पवित्र माना जाता है । दीपावली अमावस्या की काली रात को मनाई जाती है जिसका अर्थ है कि बुराई को प्रदर्शित करती काली रात को चमकदार दिए जलाकर रोशनी की अच्छाई में बदलना है

दीपावली (Diwali ) को मानाने के पीछे कई सारी साकारत्मक कहानियाँ प्रसिद्ध है जिन सभी का अर्थ साकारत्मक ऊर्जा का संचार और अधर्म पर धर्म की विजय को दर्शाता है फिर वो “रामायण” से जुडी श्री राम और रावण की हो, या फिर श्री कृष्ण और नरकासुर की हो। प्राचीन हिंदू वेदों द्वारा ये भी कहा जाता है की इस दिन माता लक्ष्मी का भी जन्म दिवाली के इसी शुभ दिन हुआ था जिस कारण उनकी पूजा की जाती है ।

दीवाली (Diwali) मानाने का सबसे प्रमुख कारण रामायण के संदर्भ में है जिसके अंतर्गत प्रभु श्री राम ने रावण को हराकर बुराई का नाश किया था जिसे हम दशहरा के रूप में मानते है और सीता माता को रावण की कैद से वापस लाये थे जो कि एक सुनहरा दिन था सभी भारतवासियों के लिए । जिसके 15-20 दिनों बाद श्री राम, माता सीता और भ्राता लक्ष्मण 14 वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या लौट आये थे । श्री राम के अयोध्या वापस आने की ख़ुशी में अयोध्यावासियों ने अमावस्या की काली रात को चमकदार बनाने के लिए घी के दिए जला कर प्रभु श्री राम का स्वागत किया था । तभी से दिवाली एक सकारात्मक रूप में मनाई जाती है जिससे एक नए वर्ष की शुरआत सकारात्मक ऊर्जा के साथ हो ।

दिवाली (Diwali) के पांच दिन ।

  1. धन्वंतरी त्रयोदशी – पहला दिन है जो भारत में दिवाली के त्योहार को चिह्नित करता है ।


कार्तिक के विक्रम संवत हिंदू कैलेंडर महीने में कृष्ण पक्ष (तेरहवें पखवाड़े) के तेरहवें चंद्र दिवस पर धनतेरस मनाया जाता है। धन्वंतरि, जिन्हें धनतेरस के अवसर पर भी पूजा जाता है, वे आयुर्वेद के देवता हैं जिन्होंने मानव जाति की भलाई के लिए आयुर्वेद का ज्ञान दिया और बीमारी के कष्ट से छुटकारा पाने में मदद की।

धनतेरस पर भगवान धन्वंतरी की पूजा होती है। भगवान धन्वंतरि, हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान उभरे थे, एक हाथ में अमृत से भरा कलश और दूसरे हाथ में आयुर्वेद के बारे में पवित्र पाठ था। उन्हें देवताओं का वैद्य माना जाता है।

2. नरका चतुर्दशी ।

दिवाली के प्रत्येक दिन की अपनी कहानी है। त्यौहार के एक दिन पहले नरका चतुर्दशी भगवान कृष्ण और उनकी पत्नी सत्यभामा द्वारा राक्षस नरका के वध का प्रतीक है।
जहाँ भगवान कृष्ण ने 16,000 बंदी राजकुमारियों को बचाया था ।

जैसा कि राजकुमारियों की शुद्धता पर सवाल उठाया जा सकता है, भगवान कृष्ण ने उन सभी से शादी की।

3. दीपावली (Diwali) के दिन ।

दीपावली के दिन अमावस्या को माता लक्ष्मी की पूजा तब होती है जब वह अपने भक्तों की मनोकामनाओं को पूरा करती हैं। अमावस्या भगवान विष्णु की कहानी भी बताती है, जिन्होंने अपने बौने अवतार में, अत्याचारी बाली को मार डाला और उसे नरक में पहुंचा दिया। बाली एक बार एक साल पृथ्वी पर लौटने के लिए लैंप के लाखों प्रकाश और अंधकार और अज्ञान को दूर करते हुए प्रेम और ज्ञान की चमक के प्रसार के लिए अनुमति दी है।

इस दिन भगवान श्री राम ने एक महाकाव्य लड़ाई के बाद अपनी पत्नी को राक्षस रावण से बचाया था अयोध्या लौटे थे। आज बुराई और घर वापसी पर अच्छाई की जीत दिखाने के लिए मोमबत्तिया और दिए जलाए जाते हैं। घर में लक्ष्मी का स्वागत करने के लिए अन्य भारतीयों के बीच गुजराती भारतीय भी अपनी खिड़कियों में दीपक जलाते हैं।

त्योहार के उच्च बिंदु को चिह्नित करने के लिए आतिशबाजी की जाती है। यह कई क्षेत्रों में हिंदू वर्ष का अंतिम दिन है, जब व्यवसाय पुराने खातों को बंद कर देते हैं।

4. गोवर्धन पूजा।

भोजन का पर्वत गोवर्धन पहाड़ी का प्रतीक है। इस पारंपरिक कहानी में श्री कृष्ण ने स्वर्ग के राजा इंद्र की वजह से बाढ़ से ग्रामीणों को आश्रय देने के लिए पहाड़ी को उठा लिया था । इंद्र, हिंदुओं की तरह ही परमात्मा के सामने विनम्र होना सीखते हैं।

5. भाई दूज ।

भाई दूज त्यौहार मानाने के पीछे भी एक कहानी बताई जाती है जिसके अंतर्गत श्री कृष्ण नरकासुर का वध करने के बाद अपनी बहन सुभद्रा के घर गए थे और वहा उनकी बहन सुभद्रा ने तिलक कर उनका स्वागत फूलों और मिठाइयों के साथ किया था। इस तरह भाई दूज त्यौहार मानाने की शुरुआत हुई। इस दिन को यम द्वितीया (जिसे भाई दूज भी कहा जाता है) कहा जाता है, और इस दिन बहनें अपने भाइयों को अपने घरों में आमंत्रित करती हैं।

दूज त्यौहार मानाने की शुरुआत हुई। इस दिन को यम द्वितीया (जिसे भाई दूज भी कहा जाता है) कहा जाता है, और इस दिन बहनें अपने भाइयों को अपने घरों में आमंत्रित करती हैं।

रोशनी और पटाखों का महत्व

दिवाली के सभी सरल अनुष्ठानों का एक महत्व और उनके पीछे एक कहानी है। घरों को रोशनी से रोशन किया जाता है, और पटाखे आकाश को स्वास्थ्य, धन, ज्ञान, शांति, और समृद्धि की प्राप्ति के लिए स्वर्ग के सम्मान के रूप में भरते हैं।

एक मान्यता के अनुसार, पटाखों की आवाज पृथ्वी पर रहने वाले लोगों की खुशी को इंगित करती है, जिससे देवताओं को उनकी भरपूर स्थिति के बारे में पता चलता है। अभी भी एक और संभावित कारण का अधिक वैज्ञानिक आधार है: पटाखों द्वारा उत्पादित धुएं मच्छरों सहित कई कीड़ों को मारते हैं या पीछे हटा देते हैं, जो बारिश के बाद भरपूर मात्रा में होते हैं।

दिवाली (Diwali) का आध्यात्मिक महत्व

रोशनी, जुआ और मस्ती से परे, दिवाली भी जीवन को प्रतिबिंबित करने और आगामी वर्ष के लिए बदलाव लाने का समय है। इसके साथ, ऐसे कई रिवाज हैं जो प्रति वर्ष प्रिय होते हैं।

देना और क्षमा करना।–

 यह आम बात है कि लोग दीवाली के दौरान दूसरों के द्वारा किए गए गलतियों को भूल जाते हैं और माफ कर देते हैं। हर जगह स्वतंत्रता, उत्सव और मित्रता की एक हवा है।

एकजुट और एकीकृत करें।

 दिवाली एक एकीकृत घटना है, और यह दिलों के सबसे कठिन को भी नरम कर सकती है। यह एक ऐसा समय है जब लोग खुशी में झूमते हैं और एक-दूसरे को गले लगाते हैं।

जिन लोगों के मन में आत्मिक कान होते हैं, वे स्पष्ट रूप से ऋषियों की आवाज सुनेंगे, “हे भगवान के बच्चों को एकजुट करो, और सभी को प्यार करो।” प्रेम के अभिवादन से उत्पन्न कंपन, जो वातावरण को भर देते हैं, शक्तिशाली हैं। जब दिल काफ़ी सख्त हो गया है, तो दीपावली के एक निरंतर उत्सव से घृणा के विनाशकारी रास्ते से दूर होने की तत्काल आवश्यकता को फिर से जन्म मिल सकता है।

अपने भीतर के आत्म को रोशन करें। दिवाली की रोशनी आंतरिक रोशनी के समय को भी दर्शाती है। हिंदुओं का मानना ​​है कि रोशनी की रोशनी वह है जो दिल के कक्ष में लगातार चमकती है। चुपचाप बैठना और इस परम ज्योति पर मन को स्थिर करना आत्मा को रोशन करता है। यह अनन्त आनंद की खेती और आनंद लेने का अवसर है।

अंधेरे से उजाले तक

दीपावली की प्रत्येक पौराणिक कथा, मिथक और कहानी में बुराई पर अच्छाई की जीत का महत्व निहित है। दीपावली हमारे घरों और दिलों को रोशन करते हैं , यह सभी प्राणियों के मन और जीवन से अंधकार को दूर करता है , और उन्हें आशा की नयी किरण की और ले जाता है ।

प्रकाश हमें स्वयं को अच्छे कार्यों के लिए प्रतिबद्ध करता है और हमें देवत्व के करीब लाता है। दिवाली के दौरान, रोशनी भारत के हर कोने को रोशन करती है, और पटाखों की आवाज़, खुशी, उत्साह और आशा के साथ घुलने वाली अगरबत्ती की खुशबू हवा में लटक जाती है।

दीपावली निष्कर्ष

दीपावली (Diwali) से हमें यही सीख मिलती है की , बुराई चाहे कितनी भी प्रबल और ताकतवर क्यों ना हो, अच्छाई उसे हरा हि देती है , जैसे हर गहरे रात्रि के बाद एक रौशनी की किरण फूटती है , उसी प्रकार हर बुराई को अच्छी के सामने झुतना ही पड़ता है, मन में हमें आशा की ज्योति जलाये रखनी चाहिए , और अच्छे कर्म करते रहने चाहिए , हमारे कर्म ही हमारे आगे के जीवन को निर्धारित करती है की, वो जीवन सुखद होगा या दुखद।

इस दिवाली आप ये प्रण ले , की कभी निराश नहीं होंगे , सदा मुस्कुराते रहेंगे और दुसरो को खुशियां बांटते रहेंगे , और सत्य के मार्ग पे चलते रहेंगे।

अच्छे कर्म का परिणाम भी अच्छा होता है

जय हिन्द !!
जय भारती !!

Read about the Inspirational Journey of the great Shaheed Bhagat Singh

Inspirational shlok from shrimad Bhagwat Geeta

11 Most Inspirational Quotes of Dr. A. P. J. Abdul Kalam

The inspirational writer of Harry Potter Series JK Rowling

JK Rowling

JK Rowling (Harry Potter)

JK Rowling
Image of JK Rowling writer of the Harry Potter series Image Source: https://www.jkrowling.com

जे. के. रोलिंग (JK Rowling) writer of Harry Potter का पूरा नाम जोअन्नी कैथलीन रोलिंग (Joanne Kathleen Rowling) हैं उनका जन्म 31 जुलाई 1965 में इंग्लैंड के यते ग्लॉस्टरशायर(Gloucestershire) में हुआ, उनके पिता का नाम पीटर जेम्स रोलिंग और माता का नाम ऐनी रोलिंग था, रोलिंग एक स्कॉटिश परिवार से है ।

बचपन में रोलिंग को अपने स्कूली विषयो के अलावा किताबे पढ़ने ज्यादा पसंद नहीं था, वह स्कूल में एक औसतन विद्यार्थी थी, युवाअवस्था में रोलिंग की आंटी ने जब उन्हें जेसिका मिटफोर्ड की आत्मकथा ”होन्स एंड रेबल्स” की किताब पढ़ने के लिए दी उसे पढ़ने के बाद रोलिंग की रूचि जेसिका मिटफोर्ड की तरफ बढ़ने लगी और उन्होंने जेसिका मिटफोर्ड की सभी किताबे पढ़ डाली जिसके बाद ”जेसिका मिटफोर्ड” रोलिंग के लिए प्रेरणास्रोत बन गई और यही से रोलिंग का आकर्षण किताबो की तरफ बढ़ने लगा ।

जब रोलिंग 14 वर्ष की थी तब उनकी एक सहेली ने उन्हें एक ऐसी किताब पढ़ने के लिए दी, जो जादूगरों और चुड़ैलों के विषय में थी जिसे पढ़ने के बाद रोलिंग जादूगरों और चुड़ैलों की किताबो की तरफ आकर्षित हुई ।

रोलिंग को बचपन से ही लिखने का बड़ा शौक था वे हमेशा कुछ कहानियाँ लिखती थी जिससे उन्होंने ख़ुशी मिलती थी और अपनी लिखी हुई कहानियाँ अपनी बहन को सुनाया करती थी, बचपन से ही उनका सपना था की वह एक लिखिका बने जिनके लिखे हुए लेख बड़ी-बड़ी किताबो और समाचार पत्र में छपे । रोलिंग ने अपनी पहली किताब 6 साल की उम्र में लिखी और उसका नाम ”रैबिट कॉल्ड रैबिट” (Rabbit Called Rabbit) रखा ।

रोलिंग ने अपनी प्राइमरी शिक्षा सेंट माइकल प्राइमरी स्कूल (St. Michael Primary School)  से ग्रहण की और अपनी माध्यमिक शिक्षा वाइडेन स्कूल एंड यूनिवर्सिटी (Widen School and University) से पूरी करने के बाद उन्होंने ने ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी (Oxford University) में पढाई करने के लिए प्रवेश परीक्षा दी लेकिन दुर्भाग्यवश उन्हें ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी (Oxford University) में प्रवेश नहीं मिला । जिसके बाद उन्होंने बी.ए.(B.A) में स्नातक की पढाई एक्सेटर यूनिवर्सिटी (Exter University) से पूर्ण की, अपनी स्नातक की परीक्षा पूरी करने के बाद रोलिंग ने एमनेस्टी इंटरनेशनल (Amnesty International Company) कंपनी में रीसर्चर एंड बिलिन्गुएल सेक्रेटरी के तौर पर लंदन (London) में काम किया ।

एक दिन जब रोलिंग मेनचेस्टर से लंदन जा रहीं थी तब किसी कारण वश ट्रैन के देर होने की वजह से रोलिंग को 4 घंटे स्टेशन पर ही प्रर्तीक्षा करनी पड़ी उन 4 घंटो ने इनकी ज़िन्दगी को बदल दिया उन्ही 4 घंटो के भीतर उनके दिमाग में हैरी पॉटर(Harry Potter) की कहानी ने जन्म लिया और उन्होंने कहानी लिखना शुरू किया यही कारण है की उन्होंने हैरी पॉटर (Harry Potter) के हर संस्करण में रेलवे स्टेशन का एक अलग महत्व दिया है क्योंकि यही वो मोड़ था जिसने एक महान कहानी को जन्म दिया और कामयाबी के कई परचम लहराए दिए।

हैरी पॉटर कहानी का जन्म ।

रोलिंग की ज़िन्दगी का वो दिन बहुत ही दुखद था जब उनके माता ऐनी रोलिंग का देहांत हुआ उनकी माँ मल्टीपल स्कलेटोसिस (Multiple Sclerosis) बीमारी से ग्रस्त थी जो एक दिमागी बीमारी है जिसकी वजह से वह लम्बे समय से बीमार थी उनकी उम्र उस समय 25 वर्ष थी। माँ की मृत्यु के बाद रोलिंग ने जैसे जीना ही छोड़ दिया वे पूरी तरह से टूट गयी थी ये तब हुआ जब उन्हें हैरी पॉटर (Harry Potter) लिखते हुए 6 महीने ही हुए थे वे दुखी और खुद से नाराज़ भी थीं क्योंकि वे अपनी माँ को अपने लिखने के बारे में कुछ भी बता नहीं सकीं।

दुखी रोलिंग अपनी माँ के मृत्यु के बाद 1992 में पुर्तगाल शहर चली गयी। जहाँ उन्होंने अंग्रेजी पढ़ना शुरू किया और पढाई के बीच समय निकाल कर अपनी कहानी पूरी करने लगीं। उन दिनों रोलिंग रात-रात भर जाग कर पूरी मेहनत से अपनी कहानी को पूरी करने में जुट गई और अपनी नींद को त्याग कर खुद को कहानी लेखन में झोंक दिया ।

उसी दौरान उनके जीवन में एक नया मोड़ आया जब उनकी मुलाकात पुर्तगाल के एक टी:वी पत्रकार जेन ऑस्टन (Jane Austen) से हुई । उनके बीच नजदीकियां बढ़ने लगी और एक दूसरे से प्रेम करने लगे कुछ समय बाद उन्होंने 1992 में विवाह किया व कुछ समय के उपरांत उन्होंने एक नन्ही परी को जन्म दिया जिसका नाम उन्होंने जेसिका रखा।

जेसिका के जन्म के बाद उनके व्यव्हाहिक जीवन में खटास आने लगी और विवाह के 13 महीनों बाद 1993 में उनकी शादी टूट गयी। इस दु:खद घटना के बाद रोलिंग स्कॉट्लैंड(Scotland) के शहर एडिनबर्ग (Edinburgh) अपनी बहन के पास चली गई उस दौरान वे गहरे डिप्प्रेशन(Depression) की शिकार हो गयी और खुद को एक असफल महिला समझने लगी जिनके पास ना तो नौकरी थी और ना ही उनकी शादी सफल हो पाई अब अपनी बेटी जेसिका की जिम्मेदारी भी अब उन पर थी ।

रोलिंग तनाव महसूस करने लगीं जिस कारण उन्हने आत्महत्या करने का विचार किया परन्तु होनी को कुछ और ही मंजूर था उन्होंने खुद को समेटा और अपने आप को बिखरने से रोका। एक जिम्मेदार माता की परिभाषा देते हुए उन्होंने सारी मुश्किलों का डट कर सामना किया और नौकरी करने का फैसला किया क्योकि इंग्लैंड(England) में मिलने वाला कल्याण लाभ (Welfare Benefit) इतना पर्याप्त नहीं था की वह अपनी और अपनी बेटी जेसिका की देखभाल अच्छी तरह कर पाए ।

1995 में रोलिंग मोरे हॉउस स्कूल ऑफ़ एजुकेशन (Moray House School of Education) से एडिनबर्घ यूनिवर्सिटी (Edinburgh University) में शिक्षक प्रशिक्षण कोर्स(Teacher Training Course) किया और एडिनबर्घ यूनिवर्सिटी (Edinburgh University) में नौकरी करने लगी। ऑफिस से आने के बाद रोलिंग अपनी हैरी पॉटर की कहानी पूरी करने में जुट जाती थी वे कई बार अलग-अलग कैफ़े में जा कर अपनी कहानी पूरी की किया करती थी।

उस समय रोलिंग बहुत गरीब थी इसलिए उनके पास कंप्यूटर खरीदने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे परन्तु वे कहा रुकने वाली थी वे निराश नहीं हुई और उन्होंने हाथ से लिखने का निर्णय लिया और अंततः उन्होने 1995 में अपनी किताब ”हैरी पॉटर” (Harry Potter) का पहला संस्करण हैरी पॉटर एंड द फिलोसोफर्स स्टोन (Harry Potter and the Philosopher’s Stone) पूरी की ।

हैरी पॉटर की कहानी पूरी करने के बाद भी कुछ संघर्ष रोलिंग के लिए बाकी था यही कारण था की लगभग एक साल तक उन्होंने अलग-अलग 12 प्रकाशन को अपनी हैरी पॉटर(Harry Potter) कहानी का संस्करण भेजा जो कि सभी 12 प्रकाशन द्वारा नाकारा जा चुका था

वह निराश थी लेकिन निराशा के बाद भी रोलिंग ने प्रयास करना नहीं छोड़ा, वह कोशिश करती रही और इतने कड़े संघर्ष के बाद जे. के. रोलिंग (JK Rowling) के जीवन का सबसे प्रतीक्षित छण आ ही गया जिसके लिए रोलिंग ने कड़ा संघर्ष किया था, करीब एक साल के बाद लंदन(London) के एक छोटे से पब्लिशर हाउस ब्लूम्सबरॉय (Bloomsbury) ने उन्हें अवसर दिया जब उस पब्लिशर हाउस के सीईओ (CEO) की 8 वर्ष की बेटी को हैरी पॉटर (Harry Potter) की कहानी से प्यार हो गया और इतनी पसंद आई की उस छोटी बच्ची ने अपने पिता से हैरी पॉटर (Harry Potter) के दूसरे संस्करण के लिए कहा।

किताब की पहली 100 कॉपी प्रकाशित की गयी जिसके 8 महीनो के बाद हैरी पॉटर की कहानी को लोगो द्वारा सराहा जाने लगा और देखते-देखते ये लोगो में बहुचर्चित हो गई। बच्चो से लेकर वृद्ध तक इस पुष्तक ने अमिट छाप छोड़ दी। हैरी पॉटर एंड द फिलोसोफर्स स्टोन को ब्रिटिश बुक अवार्ड मिला (British Books Award) और बाद में चिल्ड्रन बुक्स अवार्ड भी मिला ।

किताब का इंग्लैंड में सफल होने के बाद अमेरिका में किताब को बेचने के अधिकार (राइट्स) की नीलामी रखी गयी जिसे अमेरिका की कंपनी स्कॉलैस्टिक(Scholastic) ने 10,00,000 डॉलर में खरीद लिया और धीरे-धीरे हैरी पॉटर दुनिया भर में प्रसिद्ध हो गयी और इस तरह देखते ही देखते रोलिंग एक सफल लेखिका बन गयी जो उनके बचपन का सपना था अपनी पहली किताब के सफल होने के बाद उन्होंने अपना ध्यान हैरी पॉटर की श्रंखला की ओर केंद्रित किया और कुल मिलाकर 7 किताबो की एक श्रंखला लिखी ।

आज तक जे. के. रोलिंग की कहानियों का 60 भाषाओं में अनुवादन हो चूका है और करीब-करीब 200 देशो में उनकी पुस्तकों और कहानियो को पढ़ा जाता है । हैरी पॉटर की कहानी के अलावा भी रोलिंग ने कई किताबे लिखी है जिसमे फैंटास्टिक बीस्ट्स एंड व्हेर टू फाइंड देम (Fantastic Beasts and Where to Find Them 2001), द कुक्कुस कॉलिंग (The Cuckoo’s Calling 2013), द सिल्कवर्म (The Silkworms 2014), द कैज़ुअल वेकन्सी (The Casual Vacancy 2012) लोकप्रिय हुई।

हैरी पॉटर की श्रंखला (Harry Potter Series)

  1. हैरी पॉटर और पारस पत्थर ( harry potter and the philosopher’s stone).

  2. हैरी पॉटर रहस्य्मयी तहख़ाना (Harry Potter and the Chamber of Secrets).

  3. हैरी पॉटर अज़्काबान का क़ैदी (Harry Potter and the Prisoner of Azkaban).

  4. हैरी पॉटर आग का प्याला (Harry Potter and the Goblet of Fire).

  5. हैरी पॉटर माया पंछी का समूह (Harry Potter and the Order of the Phoenix).

  6. हैरी पॉटर हाफ़ ब्लड प्रिंस (Harry Potter and the Half-Blood Prince).

  7. हैरी पॉटर मौत के तोहफ़े (Harry Potter and the Deathly Hallows).

जे. के. रोलिंग (JK Rowling) एक समाज सेवी भी है जो ग़रीब बच्चों के लिए अलग-अलग चैरटी चलाती है और रोलिंग मल्टीपल स्क्लेरोसिस (Multiple Sclerosis) में भी चैरटी करती है रोलिंग ने एक बार अपनी कमाई का 16% अलग-अलग संस्थाओ को दान कर दिया जिसके बाद फोर्बेस को उन्हें बिलियनेयर्स की सूची से हटाना पड़ा।

रोलिंग Rowling का कहना है कि जब हमे कोई चीज़ जरूरत से ज़्यादा मिले तो हमारा सबसे पहला धर्म है कि उसका समझदारी से प्रयोग करे।

जे. के. रोलिंग को पुरस्कार और सम्मान।

1997 Nestle Smarties Prize Gold Award (हैरी पॉटर और पारस पत्थर Harry Potter and the Philosopher’s Stone)

1998 Nestle Smarties prize gold award (हैरी पॉटर रहस्य्मयी तहख़ाना Harry Potter and The Chamber of Secret)

1998 Bookseller Association author of the Year

1999 Nestle Smarties prize gold award (हैरी पॉटर अज़्काबान का क़ैदी Harry Potter and The Prisoners of Azkaban)

1999 Bookseller Association author of the Year

2000 British book of the year for author of the year.

2001 Order of the British (OBE) (for service to children’s literature)

2008 British Book Awards.

Inspiretome.com

click here to read the inspirational journey of saheed bhagat Singh