स्वामी विवेकानन्द : उम्मीद की किरण।

उम्मीद एक ऐसा विश्वास है जो हमे हमारी ज़िंदगी में कभी हारने नहीं देती, उम्मीद एक वो किरण है जिसकी ताकत पर हम पूरी दुनिया को जीत सकते है, वो उम्मीद ही है जो सब कुछ नष्ट होने के  बावजुद भी हमे झुकने नहीं देती, जिसके सहारे हम खुद पर विश्वास बनाये रखते है उम्मीद की एक छोटी सी चिंगारी भी हमे विजयी बना सकती है ‘‘उम्मीद को हमेशा बनाये रखना चाहिए क्योंकि उम्मीद के भरोसे ही हम सब कुछ वापस ला सकते हैं’’ स्वामी विवेकानन्द का ये अनमोल वचन आज भी हमे कठिन परिस्थितियों में टूटने नहीं देता ।

”स्वामी विवेकानन्द” ”विश्वनाथ दत्त” और ”भुवनेश्वरी देवी” के आठ बच्चों में से एक थे। उनका जन्म 12 जनवरी, 1863 को मकर संक्रांति के दिन कोलकाता में हुआ था उनका वास्तविक नाम ”नरेन्द्र नाथ दत्त” था। उनके पिता का नाम ”विश्वनाथ दत्त” और माता का नाम ”भुवनेश्वरी देवी” था उनके पिता कोलकाता हाई कोर्ट के एक सफल वक़ील थे जिन्हे अंग्रेजी और फ़ारसी भाषा का भी ज्ञान था, माता भुवनेश्वरी देवी धार्मिक प्रवृति की थी जिन्हे ”रामायण” और ”महाभारत” जैसे धार्मिक ग्रंथो का पूर्ण ज्ञान था इसके साथ ही वे प्रतिभाशाली और बुद्धिमानी महिला थी जिन्हें अंग्रेजी भाषा की भी काफी अच्छी समझ थी।

माता ”भुवनेश्वरी देवी” की धार्मिक प्रवृति को देख नरेन्द्र की भी रूचि धार्मिक ग्रंथो की तरफ होने लगी, और धीरे-धीरे आध्यात्मि में ध्यानमग्न होने लगे, उन्हें अपनी माता से हिन्दू धर्म और संस्कृति का ज्ञान मिला तो मिला ही और तो और अंग्रेजी भाषा का प्रारम्भिक ज्ञान भी उन्होंने अपनी माँ से प्राप्त किया ।

एक युवा लड़के के रूप में नरेंद्रनाथ ने तेज बुद्धि का प्रदर्शन किया और अपने शरारती स्वभाव के साथ-साथ संगीत में भी रूचि रखते थे उन्होंने अपनी पढ़ाई में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। वह एक उत्साही पाठक थे जब वे कॉलेज से स्नातक हुए तब तक उन्होंने विभिन्न विषयों का एक विशाल ज्ञान प्राप्त कर लिया था। वह खेल, जिमनास्टिक, कुश्ती और बॉडी बिल्डिंग में भी   सक्रिय थे। स्वामी विवेकानन्द की दर्शन, धर्म, इतिहास और समाजिक विज्ञान जैसे विषयों में काफी रूचि थी । वेद उपनिषद , रामायण, गीता और हिन्दू शास्त्र वे काफी उत्साह के साथ पढ़ते थे यही वजह है कि वे ग्रन्थों और शास्त्रों के पूर्ण ज्ञाता थे । दूसरी ओर उन्होंने डेविड ह्यूम, जोहान गोटलिब फिच्ते और हर्बर्ट स्पेंसर द्वारा पश्चिमी दर्शन, इतिहास और आध्यात्मिकता का अध्ययन किया।

आध्यात्मिक जागृति (Spiritual Awakening)

अपने गुरु श्री रामाकृष्णा जी से काफी प्रभावित थे, उन्होंने अपने गुरु से ही सीखा हर जीव में ”ईश्वर” का वास होता है, मानव जाति की सेवा के द्वारा ईश्वर की सेवा भी की जा सकती है, 1884 में नरेंद्रनाथ अपने पिता की मृत्यु के कारण काफी आर्थिक संकट से गुज़रे क्योंकि उन्हें अपनी माँ और छोटे भाई-बहनों का साथ देना पड़ा। उन्होंने रामकृष्ण से अपने परिवार के आर्थिक कल्याण के लिए देवी से प्रार्थना करने के लिए कहा रामकृष्ण के सुझाव पर वह खुद मंदिर में प्रार्थना करने गए। लेकिन एक बार जब उन्होंने देवी का सामना किया, तो वे धन और धन नहीं मांग सकते थे, इसके बजाय उन्होंने ‘विवेक’ (विवेक) और ‘बैराग्य’ (शामिल करने) के लिए कहा। उस दिन नरेंद्रनाथ के पूर्ण आध्यात्मिक जागरण को चिह्नित किया गया और उन्होंने खुद को जीवन के एक तपस्वी के रूप में पाया।

”स्वामी विवेकानन्द” एक हिंदू भिक्षु थे और भारत के सबसे प्रसिद्ध आध्यात्मिक नेताओं में से एक थे, ”विवेकानन्द” बड़े स्‍वप्न‍दृष्‍टा थे। उन्‍होंने एक ऐसे समाज की कल्‍पना की थी जिसमें धर्म या जाति के आधार पर मनुष्य-मनुष्य में कोई भेद न रहे। वह सिर्फ एक आध्यात्मिक दिमाग से अधिक थे वह एक प्रखर विचारक, महान वक्ता और भावुक देशभक्त थे। उन्होंने विश्व मंच पर एक श्रद्धेय धर्म के रूप में हिंदू धर्म की स्थापना की और गरीबों व जरूरतमंदों की सेवा में अपने देश के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने व समाज की भलाई के लिए अथक प्रयास किये।

”विवेकानन्‍द जी ” को युवकों से बड़ी आशाएँ थीं, स्वामी जी भारत की पिछड़ी दशा को देख कर चिंतित थे। उन्हें इस परिस्थिति का एक ही कारण समझ में आया कि जनता हिंदू धर्म के असली स्वरूप से अनभिज्ञ है। इसलिए उन्होंने हिंदू धर्म और साधना को ध्यान धारण और समाधि के आदर्श को एकांत पर्वत और गुफाओं से अलग करके जनता के हित में, लोक कल्याण के लिए जाग्रत किया। सवर्णों के दमन चक्र का उन्होंने पुरजोर विरोध किया।

विरासत (Inheritance) 

”स्वामी विवेकानन्द” ने दुनिया को एक राष्ट्र के रूप में भारत की एकता की सच्ची नींव के बारे में बताया। उन्होंने सिखाया कि मानवता और भाई-चारे की भावना से इतनी बड़ी विविधता वाला देश एक साथ कैसे बंध सकता है। ”विवेकानन्द” ने पश्चिमी संस्कृति की कमियों और उन पर काबू पाने के लिए भारत के योगदान पर जोर दिया। ”नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने एक बार कहा था: “स्वामीजी ने पूर्व और पश्चिम, धर्म और विज्ञान, अतीत और वर्तमान में सामंजस्य स्थापित किया। और इसलिए वह महान हैं।” हमारे देशवासियों ने उनकी शिक्षाओं से अभूतपूर्व आत्म-सम्मान, आत्म-निर्भरता और आत्म-सम्मान प्राप्त किया है। ”विवेकानन्द” पूर्व और पश्चिम की संस्कृति के बीच एक आभासी पुल का निर्माण करने में सफल रहे। उन्होंने हिंदू धर्मग्रंथों, दर्शन और पश्चिमी लोगों के जीवन के तरीके की व्याख्या की। उन्होंने उन्हें एहसास दिलाया कि गरीबी और पिछड़ेपन के बावजूद, विश्व संस्कृति बनाने में भारत का बहुत बड़ा योगदान था। उन्होंने शेष विश्व से भारत के सांस्कृतिक अलगाव को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।

शिक्षण और रामकृष्ण मिशन।

आम और शाही समान रूप से गर्मजोशी से स्वागत के बीच विवेकानन्द 1897 में भारत लौट आए। देश भर में व्याख्यान देने के बाद वे कलकत्ता पहुँचे और 1 मई, 1897 को कलकत्ता के पास बेलूर मठ में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। रामकृष्ण मिशन के लक्ष्य कर्म योग के आदर्शों पर आधारित थे और इसका प्राथमिक उद्देश्य देश की गरीब और संकटग्रस्त आबादी की सेवा करना था।रामकृष्ण मिशन ने देश भर में राहत और पुनर्वास कार्यों की शुरुआत करते हुए सम्मेलन, सेमिनार और कार्यशालाओं के माध्यम से वेदांत के व्यावहारिक सिद्धांतों के प्रचार-प्रसार और स्कूल, कोलाज और अस्पतालों की स्थापना, सामाजिक सेवा के विभिन्न रूपों को अपनाया।

उनकी धार्मिक अंतरात्मा श्री रामकृष्ण की दिव्य अभिव्यक्ति की आध्यात्मिक शिक्षाओं और अद्वैत वेदांत दर्शन के उनके व्यक्तिगत आंतरिककरण का एक समामेलन थी। उन्होंने निस्वार्थ कार्य, पूजा और मानसिक अनुशासन के द्वारा आत्मा की दिव्यता को प्राप्त करने का निर्देश दिया। विवेकानन्द के अनुसार, आत्मा की स्वतंत्रता को प्राप्त करना अंतिम लक्ष्य है और यह एक व्यक्ति के धर्म की संपूर्णता को समाहित करता है।

”स्वामी विवेकानन्द” एक प्रमुख राष्ट्रवादी थे, और उनके मन में अपने देशवासियों का समग्र कल्याण था। उन्होंने अपने साथी देशवासियों से “उठो, जागो और लक्ष्य तक पहुँचने तक नहीं रुकना” का आग्रह किया।

”स्वामी विवेकानन्द” की शक्ति का ज्ञान दुनिया को जब हुआ जब उन्हें 1893 में अमेरिका के शिकागो में आयोजित होने वाले विश्व धर्म संसद के बारे में पता चला। ”विवेकानन्द” 1893 में शिकागो पहुंचे जहां उन्होनें विश्व धर्म सम्मेलन में हिस्सा लिया। इस दौरान एक जगह पर कई धर्म गुरुओ ने अपनी किताब रखी वहीं भारत के धर्म के वर्णन के लिए ”श्रीमदभगवतगीता” रखी गई थी जिसका खूब मजाक उड़ाया गया, लेकिन जब विवेकानन्द में अपने अध्यात्म और ज्ञान से भरा भाषण की शुरुआत की तब सभागार तालियों से गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

”भारत” के सबसे दक्षिणी सिरे कन्याकुमारी की चट्टानों पर ध्यान करते हुए उन्हें अपनी इच्छाओं का पता चला। मद्रास (अब चेन्नई) में उनके शिष्यों द्वारा पैसा जुटाया गया और अजित सिंह, खेतड़ी के राजा, और विवेकानन्द 31 मई, 1893 को बंबई से शिकागो के लिए रवाना हुए। शिकागो जाने के रास्ते में उन्हें बहुत कठिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनकी आत्माएं हमेशा की तरह अदम्य रहीं।

विश्व सम्म्मेलन में उन्होंने भारतवर्ष की ऐसे छवि बनायीं जिसे जान कर दुनिया की मानसिकता एक दम से बदल गयी दुनिया को उस दिन पता चला कि भारत सिर्फ सपेरों का देश नहीं बल्कि ”भारत” एक विश्व गुरु है जिसने  दुनिया को एक नई राह दिखाई है ”स्वामी विवेकानन्द” के भाषण  में जहां वैदिक दर्शन का ज्ञान था वहीं उस में दुनिया में शांति से जीने का संदेश भी छुपा था, अपने भाषण में स्वामी जी ने कट्टरतावाद और सांप्रदायिकता पर जमकर प्रहार किया था।

उन्होंने अमेरिका में अगले ढाई साल बिताए और 1894 में न्यूयॉर्क के वेदांत सोसाइटी की स्थापना की। उन्होंने पश्चिमी दुनिया को वेदांत और हिंदू अध्यात्मवाद के सिद्धांतों का प्रचार करने के लिए यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom) की यात्रा भी की।

11 सितम्बर 1893: स्वामी विवेकानन्द द्धारा शिकागो में विश्व धर्म संसद में में दिया गया भाषण ।

अमेरिका के बहनों और भाइयों, आपके इस स्नेहपूर्ण और जोरदार स्वागत से मेरा हृदय अपार हर्ष से भर गया है और मैं आपको दुनिया की प्राचीनतम संत परम्परा की तरफ से धन्यवाद देता हूं मैं आपको सभी धर्मों की जननी की तरफ से धन्यवाद देता हूं और सभी जातियों, संप्रदायों के लाखों, करोड़ों हिन्दुओं की तरफ से आपका आभार व्यक्त करता हूं

मेरा धन्यवाद कुछ उन वक्ताओं को भी है, जिन्होंने इस मंच से यह कहा कि दुनिया में सहनशीलता का विचार सुदूर पूरब के देशों से फैला है, मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसे धर्म से हूं, जिसने दुनिया को सहनशीलता और सार्वभौमिक स्वीकृति का पाठ पढ़ाया. हम सिर्फ सार्वभौमिक सहनशीलता में ही विश्वास नहीं रखते, बल्कि हम विश्व के सभी धर्मों को सत्य के रूप में स्वीकार करते हैं

मुझे गर्व है कि मैं उस देश से हूं जिसने सभी धर्मों और सभी देशों के सताए गए लोगों को अपने यहां शरण दी. मुझे गर्व है कि हमने अपने दिल में इसराइल की वो पवित्र यादें संजो रखी हैं जिनमें उनके धर्मस्थलों को रोमन हमलावरों ने तहसनहस कर दिया था और फिर उन्होंने दक्षिण भारत में शरण ली, मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसे धर्म से हूं जिसने पारसी धर्म के लोगों को शरण दी और लगातार अब भी उनकी मदद कर रहा है

भाइयों, मैं आपको एक श्लोक की कुछ पंक्तियां सुनाना चाहूंगा, जिन्हें मैंने बचपन से स्मरण किया और दोहराया है और जो रोज़ करोड़ों लोगों द्वारा हर दिन दोहराया जाता हैरुचिनां वैचित्र्यादृजुकुटिलनानापथजुषामनृणामेको गम्यस्त्वमसि पयसामर्णव इव…’ इसका अर्थ हैजिस तरह अलगअलग स्रोतों से निकली विभिन्न नदियां अंत में समुद्र में जाकर मिल जाती हैं, उसी तरह मनुष्य अपनी इच्छा के अनुरूप अलगअलग मार्ग चुनता है, जो देखने में भले ही सीधे या टेढ़ेमेढ़े लगें, परंतु सभी भगवान तक ही जाते हैं

सांप्रदायिकताएं, कट्टरताएं और इनकी भयानक वंशज हठधर्मिता लंबे समय से पृथ्वी को अपने शिकंजों में जकड़े हुए हैं. इन्होंने पृथ्वी को हिंसा से भर दिया है, कितनी ही बार यह धरती खून से लाल हुई है, कितनी ही सभ्यताओं का विनाश हुआ है और जाने कितने देश नष्ट हुए हैं अगर ये भयानक राक्षस होते, तो आज मानव समाज कहीं ज्यादा उन्नत होता, लेकिन अब उनका समय पूरा हो चुका है

मुझे पूरी उम्मीद है कि आज इस सम्मेलन का शंखनाद सभी हठधर्मिताओं, हर तरह के क्लेश, चाहे वे तलवार से हों या कलम से, और सभी मनुष्यों के बीच की दुर्भावनाओं का विनाश करेगा

सफलता का ज्ञान।

एक बार ”स्वामी विवेकानन्द जी” अपन आश्रम में सो रहे थे। कि तभी एक व्यक्ति उनके पास आया जो कि बहुत दुखी था औरआते ही ”स्वामी विवेकानन्द जी” के चरणों में गिर पड़ा और बोला महाराज मै अपने जीवन में खूब मेहनत करता हु हर काम खूब मन लगाकर भी करता हु फिर भी आज तक मै कभी सफल व्यक्ति नहीं बन पाया।

उस व्यक्ति कि बाते सुनकर ”स्वामी विवेकानन्द जी” ने कहा ठीक है।आप मेरे इस पालतू कुत्ते को थोड़ा देर तक घुमाकर लाये तब तक आपके समस्या का समाधान ढूढता हु इतना कहने के बाद वह व्यक्ति कुत्ते को घुमाने के लिए चल गया।और फिर कुछ समय बीतने के बाद वह व्यक्ति वापस आया । तो स्वामी विवेकानन्द ने उस व्यक्ति से पूछ की यह कुत्ता इतना हाफ क्यों रहा है। जबकि तुम थोड़े से थके हुए नहीं लग रहे हो आखिर ऐसा क्या हुआ।

इस पर उस व्यक्ति ने कहा की मै तो सीधा अपने रास्ते पर चल रहा था जबकि यह कुत्ता इधर उधर रास्ते भर भागता रहा और कुछ भी देखता तो उधर ही दौड़ जाता था. जिसके कारण यह इतना थक गया है ।

इस पर ”स्वामी विवेकानन्द जी” मुस्कुराते हुए कहा बस यही तुम्हारे प्रश्नों का जवाब है. तुम्हारी सफलता की मंजिल तो तुम्हारे सामने ही होती है. लेकिन तुम अपने मंजिल के बजाय इधर उधर भागते हो जिससे तुम अपने जीवन मेंकभीसफलनहीहोपाए. यह बात सुनकर उस व्यक्ति को समझ में आ गया था। की यदि सफल होना है तो हमे अपने मंजिल पर ध्यान देना चाहिए।

”स्वामी विवेकानन्द जी” के इस कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती है  की हमें जो करना है। जो कुछ भी बनना है। हम उस पर ध्यान नहीं देते है ,और दुसरो को देखकर वैसा ही हम करने लगते है। जिसके कारण हम अपने सफलता के मंजिल के पास होते हुए दूर भटक जाते है। इसीलिए अगर जीवन में सफल होना है  तो हमेशा हमें अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्र्ति करना चाहिए ।

दुसरो का सम्मान करना।

”विवेकानन्द जी” समारोह के लिए विदेश गए थे। और उनके समारोह में बहुत से विदेशी लोग आये हुए थे ! उनके द्धारा दिए गए स्पीच से एक विदेशी महिला बहुत ही प्रभावित हुई और वह विवेकानन्दजी के पास आयी और स्वामी विवेकानन्द से बोली कि में आप से शादी करना चाहती हु ताकि आपके जैसा ही मुझे गैरवशाली पुत्र कि प्राप्ति हो।

इस पर ”स्वामी विवेकानन्द जी” बोले कि क्या आप जानती है। कि ”मै एक सन्यासी हूँ ” भला मै कैसे शादी कर सकता हु अगर आप चाहो तो मुझे आप अपना पुत्र बना लो। इस से मेरा सन्यास भी नही टूटेगा और आपको मेरे जैसा पुत्र भी मिल जाएगा। यह बात सुनते ही वह विदेशी महिला ”स्वामी विवेकानन्द जी” के चरणों में गिर पड़ी और बोली कि आप धन्य है। आप ”ईश्वर” के समान है ! जो किसी भी परिस्थिति में भी आप अपने धर्म के मार्ग से विचलित नहीं होते है।

”स्वामी विवेकानन्द जी” के इस कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती है ! कि सच्चा पुरष वही होता है । कि जो हर परिस्थिति में भी दुसरो का सम्मान करे ।

मृत्यु

”स्वामी विवेकानन्द जी” ने भविष्यवाणी की थी कि वे चालीस साल की उम्र तक नहीं रहेंगे। 4 जुलाई, 1902 को, उन्होंने बेलूर मठ में अपने दिनों के काम के बारे में जाना, विद्यार्थियों को संस्कृत व्याकरण पढ़ाया। वह शाम को अपने कमरे में चले गए और लगभग 9 बजे ध्यान के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। वह शाम को अपने कमरे में सेवानिवृत्त हो गया और लगभग 9 बजे ध्यान के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। कहा जाता है कि उसे ‘महासमाधि’ प्राप्त हुई थी और महान संत का गंगा नदी के तट पर अंतिम संस्कार किया गया था।


उम्मीद है आपको ये आर्टिकल पसंद आया होगा आशा करता  हूँ इसे पढ़ने के बाद आप भी  जीवन में एक सकारात्मक परिवर्तन अपनाये और खुद के साथ-साथ दुसरो के जीवन में भी एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार करे व उन्हें प्रेरित करे।

धन्यवाद ।

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top 30 motivational Quotes

Top 30 Motivational Quotes

Top 30 Motivational Quotes of Greatest Motivational Speakers दुनिया का सबसे महान व प्रेरक व्यक्ति आपके अंदर ही छुपा है, बहुत कम लोग होते है जो उसे ढूंढ लेते है और आगे बढ़ते है, आज जरुरत है हमारे युवाओं को कि वो अपने मन-मस्तिष्क पर लगी धुंध को हटाए और खुद को पहचाने, पहचान से आत्मविश्वास बढ़ता है और आत्मविश्वास से सकारात्मक सोच बनती हैं ।

Motivational Quotes


Swami Vivekanand image1. ‘‘उठो! जागो! और तब तक ना रुकें जब तक लक्ष्य पूरा न हो जाए।’’

‘‘Arise! Awake! and stop not till the goal is reached.’’

― Motivational Quotes by Swami Vivekananda


2. “सभी पक्षी बारिश के दौरान आश्रय पाते हैं। लेकिन गरुड़ बादलों के ऊपर उड़कर बारिश से बचता है।”

“All birds find shelter during rain. But eagle avoids rain by flying above clouds.”

― Motivational Quotes A. P. J. Abdul Kalam (Missile Man of India)

 


 

3. ‘‘सफलता के लिए पवित्रता, धैर्य और दृढ़ता तीन आवश्यक हैं और सबसे बढ़कर प्रेम।

‘‘Purity, patience, and perseverance are the three essentials to success and, above all love.

― (Swami Vivekananda)

 


 

4. “अपने दिल और अंतर्ज्ञान का पालन करने का साहस रखें। वे किसी तरह पहले से ही जानते हैं कि आप वास्तव में क्या बनना चाहते हैं। बाकी सब कुछ गौण है।”

“Have the courage to follow your heart and intuition. They somehow already know what you truly want to become. Everything else is secondary.”

― (Steve Jobs)

 


 

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5. “मैं सही निर्णय लेने में विश्वास नहीं करता। मैं फैसले लेता हूं और फिर उन्हें सही बनाता हूं।”

 

“I don’t believe in taking right decisions. I take decisions and then make them right”

― (Ratan Tata)

 


 

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6. “अगर आपको कोई चमत्कार नहीं मिलता है, तो खुद एक चमत्कार बन जाइए।’’

 

“If you can’t get a miracle, become one’’

                                                                            ― Nick Vujicic (A man without Limb)

 


 

 7. ‘‘मैं महत्वाकांक्षा और आशा और जीवन के आकर्षण से भरा हुआ हूं। लेकिन जरूरत के समय मैं सब कुछ त्याग सकता हूं।’’

 

‘‘I am full of ambition and hope and charm of life. But I can renounce everything at the time of need.’’

― (Bhagat Singh)

 


 

8. ‘‘एक विचार लो। उस एक विचार को अपना जीवन बना लो – उसके बारे में सोचो, उसके सपने देखो, उस विचार पर जियो।’’

 

‘‘Take up one idea. Make that one idea your life – think of it, dream of it, live on that idea.’’

― (Swami Vivekananda)

 


 

9. “आप अपना भविष्य नहीं बदल सकते, लेकिन अपनी आदतें बदल सकते है और निश्चित रूप से आपकी आदतें आपका भविष्य बदल देंगी।”

“You cannot change your future, but, you can change your habits, and surely your habits will change your future.”

A. P. J. Abdul Kalam (Missile Man of India)

 


 

 10. ‘‘सफलता एक अच्छा शिक्षक नहीं है, असफलता आपको विनम्र बनाती है।’’

‘‘Success is not a good teacher, failure makes you humble.’’

(Shahrukh Khan)

 


 

 11.‘‘खड़े हो जाओ, और सारी जिम्मेदारी अपने कंधो पर ले लो, अपने को कमज़ोर समझना बंद कर दो।’’

 

‘‘Stand up and take all responsibility on your shoulders, stop feeling low on yourself.’’

― (Swami Vivekananda)

 


12. “मैं लगातार लोगों को प्रोत्साहित करने, जिस पर सवाल न उठा हो उस पर सवाल उठाने, नए विचार सामने लाने में शर्मिंदा ना होने, और चीजों को करने के लिए नई प्रक्रियाओं को बताने के लिए कहता रहा हूँ।‘’

“I have been constantly telling people to encourage people, to question the unquestioned and not to be ashamed to bring up new ideas, new processes to get things done.”

 ― (Ratan Tata)

 


 

image of Bhagat Singh

13. ‘‘वो हर व्यक्ति जो विकास के लिए खड़ा है, उसे हर एक रुढ़िवादी चीज की आलोचना करनी होगी, उसके प्रति अविश्वास करना होगा औरउसे चुनोती देनी होगी।”

‘‘Every person who stands for development will have to criticise every single conservative thing, have to believe in it and give it a challenge.’’

― (Bhagat Singh)

 


 

 14. एक अच्छी किताब सौ दोस्तों के बराबर है, लेकिन एक अच्छा मित्र पुरे पुस्तकालय के बराबर है

 

One best book is equal to hundred good friends, but one good friend is equal to a library.”

A. P. J. Abdul Kalam (Missile Man of India)

 


 

 15. “जब आपको बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, तो आप या तो डूबने वाले हैं या आप तैरने जा रहे हैं।’’

 

“When you have to cope with a lot of problems, you’re either going to sink or you’re going to swim.”

― (Tom Cruise)

 


 

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16. “आपका समय सीमित है, इसलिए इसे किसी और की जिंदगी जी कर व्यर्थ मत कीजिये

 

“Your time is limited, so don’t waste it living someone else’s life.”

― Steve Jobs (Co- Founder Apple)


17. “ये सोचना झूठ है कि आप उतने अच्छे नहीं हैं। ये सोचना झूठ है कि आप किसी काम के नहीं हैं।’’

 

 “It’s a lie to think you’re not good enough, it’s a lie to think you are not worth anything’’

― Nick Vujicic (A Man without Limb)

 


 

18. ‘‘आगे बढ़ने के लिए जीवन में उतर-चढ़ाव बहुत ज़रूरी हैं, क्योंकि ईसीजी में भी एक सीधी लाइन का मतलब होता है कि हम जिंदा नहीं हैं।’’

‘‘Ups and downs in life are very important to keep us going, because a straight line even in an ECG means we are not alive’’

― (Ratan Tata)


19. ‘‘कब्रिस्तान में सबसे अमीर आदमी होना मेरे लिए मायने नहीं रखता, रात में सोते जाते वक़्त कहना आज हमने कुछ शानदार किया है…ये मेरे लिए मायने रखता है।’’

Being the richest man in the cemetery doesn’t matter to me. Going to bed at night saying we’ve done something wonderful… that’s what matters to me.”

― Steve Jobs (Co- Founder Apple)


20. ‘‘खुद को ऐसे सोचो जैसे कि तुम सीढ़ी चढ़ रहे हो। अगले पायदान पर जाने के लिए तुम्हे अपनी पकड़ छोड़नी होगी और अगले की तरफ बढ़ना होगा।’’

“Think of yourself as climbing a ladder. To move to the next rung, you must give up your grip and reach for the next one.”

                              ― Nick Vujicic (A Man Without Limb)

 


 

21. ‘‘सरल जटिल से कठिन हो सकता है: सरल करने के लिए आपको कड़ी मेहनत से अपनी सोच साफ़ करनी पड़ती है, लेकिन अंत में ये करना सही रहता है क्योंकि एक बार जब आप ये कर लेते हैं तब आप पहाड़ हिला सकते हैं ’’

“Simple can be harder than complex: You have to work hard to get your thinking clean to make it simple. But it’s worth it in the end because once you get there, you can move mountains.”

      ― Steve Jobs (Co- Founder Apple)


  22. ‘‘कभी-कभी जब आप कुछ नया करते हैं, आपसे गलतियाँ हो जाती हैं, ये सबसे अच्छा है कि आप उन्हें जल्द स्वीकार कर लें, और अपने अन्य नई ख़ोज को सुधारने में लग जाएं।’’

Sometimes when you innovate, you make mistakes. It is best to admit them quickly, and get on with improving your other innovations.”

 

― Steve Jobs (Co- Founder Apple)

Shahrukh Khan image

23. ‘‘सफलता और असफलता दोनों जीवन का हिस्सा हैं। दोनों स्थायी नहीं हैं।’’

‘‘Success and failure are both part of life. Both are not permanent.’’

― (Shahrukh Khan)


24. ‘‘जिंदगी तो अपनेदम पर जी जाती है, दूसरों के कन्धों पर तो जनाजे उठाये जाते है।’’

‘‘Life is live its own, others help is needed in funerals only. ’’

― (Bhagat Singh)


 

 25. ‘‘सारी शक्ति तुम्हारे अंदर ही है, तुम हर चीज़ कर सकते हो ।’’

 

‘‘All power is within you, you can do everything.”

― (Swami Vivekananda)


 

 26. ‘‘अपने आप को जीतो और पूरा ब्रह्मांड तुम्हारा है।’’

 

‘‘Conquer yourself and the whole universe is yours’’

― (Swami Vivekananda)


 27. “शिक्षा सबसे शशक्त हथियार है जिससे दुनिया को बदला जा सकता है।”

“Education is the most powerful weapon which you can use to change the world.”

― (Nelson Mandela)


image of Nelson Mandela

 28.”एक बड़े पहाड़ पर चढ़ने के बाद यही पता चलता है कि अभी ऐसे कई पहाड़ चढ़ने के लिए बाकी हैं।”

“After climbing a great hill, one only finds that there are many more hills to climb.”

― (Nelson Mandela)


 

29. ‘‘हर व्यक्ति की अपनी शैली होती है, अपने आप को मैदान पर पेश करने का अपना तरीका।’’

 

‘‘Every individual has his own style, his own way of presenting himself on and off the field.’’

― (Sachin Tendulkar)


Sachin Tendulkar Image with world cup

30. ‘‘लोग आप पर पत्थर फेंकते हैं और आप उन्हें मील के पत्थर में बदल देते हैं।’’

‘‘People throw stones on you and you convert them into milestones.’’

― (Sachin Tendulkar)


उम्मीद है आपको ये उद्धरण (Quotes) पसंद आये हो, आशा हैं इसे पढ़ने के बाद आप भी जीवन में एक सकारात्मक परिवर्तन अपनाये और खुद के साथ-साथ दुसरो के जीवन में भी एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार करे व उन्हें प्रेरित करे ।

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Bhagat Singh (भगत सिंह), Rajguru (राजगुरु ), Sukhdev (सुखदेव)

Saheed Bhagat Singh – An Inspirational Journey (”एक सच्चे सेनानी का सच्चा समर्पण।”)

एक सेनानी अपने पराक्रम को प्रदर्शित करने के लिए कभी भी अवसरों की तलाश नहीं करता है, यह उनमे जन्मजात होते है, ऐसा ही कुछ हमारे सेनानी में भी था। जिन्होंने  समर्पण की परिभाषा  ही बदल दी जब वो 23 साल की उम्र में हस्ते-हस्ते फांसी पर चढ़ गए। ऐसा सच्चा समर्पण शायद ही कभी इस तरह से इतिहास  में प्रदर्शित हुआ होगा। जो हमारे क्रांतिकारी नायक शहीद भगत सिंह (Saheed Bhagat singh) द्वारा 23 मार्च 1923 में  किया गया ।

आइये दोस्तों आज भगत सिंह  (Saheed Bhagat singh) के कुछ अनछुए पहलुओं को करीब से जानते है जो वजह बनी  उनके महान व्यक्तित्व की ।

बचपन।

एक बार कि बात है कि भगत सिंह (Bhagat Singh) के हाथ बचपन में खेलते-खेलते अपने चाचा की बंदूक हाथ लग गई, बस बचपने में कहें या उत्सुक्ता में उन्होंने अपने चाचा से पूछा कि आखिर इससे क्या होता है ? उनके चाचा जी ने बताया कि वे इससे
अंग्रेजी हुकूमत को दूर भगाएंगे । बस फिर क्या था वह छोटा सा बच्चा दौड़कर अपने खेत में चला गया और पीछे-पीछे दौड़ते हुए चाचा जी भी गए देखा कि बच्चा गढ्ढ़ा खोद रहा है
, खोदने के बाद बंदूक को गढ्ढे में डालने लगा, चाचा जी से रहा नहीं गया और पूछा कि ये क्या कर रहे हो ? बड़ा ही मासूम लेकिन दृढ़ निश्चय झलका जब उस बच्चे ने कहा कि वे बंदूक की फसल उगा रहा हैं ताकि अंग्रेजों को भगाने में क्रांतिकारियों के काम आ सके।

दोस्तों यही वो समय था, जिसने भारत के इतिहास में एक क्रांति का नया बीज बोया, जो आगे चल कर इतना विशाल वृक्ष बना जिसने ब्रिटिश हुकूमत के दांत खट्टे कर दिए और उनकी नींदे उदा दी।

क्रांतिकारी भगत सिंह (Saheed Bhagat singh) को पढ़ने का बहुत शौक़ था, बचपन में ही उन्होंने 50 किताबे पढ़ डाली I वे कम उम्र में लेनिन के नेतृत्व वाले समाजवाद और समाजवादी क्रांतियों की ओर आकर्षित हुए और उनके बारे में पढ़ना शुरू किया। भगत सिंह (Bhagat Singh) ने अपने गाँव के स्कूल में पाँचवीं कक्षा तक पढ़ाई की, जिसके बाद उनके पिता किशन सिंह ने उन्हें लाहौर के दयानंद एंग्लो वैदिक हाई स्कूल में दाखिला दिलाया।

उनके इन सभी गतिविधियों ने  ही उन्हें विचारो का पक्का बनाया जो आगे चल कर उन्हें  और भी मजबूत बनाया जो  हम आगे के आर्टिकल में पढ़ेंगे –

“जिंदा रहने की ख्वाहिश कुदरती तौर पर मुझमे भी होनी चाहिए, मैं इसको छिपाना नही चाहता| लेकिन मेरा जिंदा रहना एक शर्त पर है, कि मैं कैद होकर या पाबंद होकर जिंदा नही रहना चाहता |”

जीवन के चार प्रमुख स्तम्भ

साहस, स्वाभिमान, बहादुरी और त्याग यह चार स्तंभ है जो हमारे जीवन की हर कठिनाइयों को पार करने में मदद करती है| जिसे भगत सिंह ने कुछ अलग ही रूप में दर्शाया

साहस का उठान : भगत सिंह (Bhagat Singh) द्वारा

साहस शब्द जितना छोटा है, उतना ही करिश्माई भी है, साहस का रिश्ता न तो लंबीचौड़ी कदकाठी से है और न धनदौलत से, यह हम सभी के भीतर होता है बस आवश्यकता है उसे बाहर लाने की ।

कम उम्र में भगत सिंह (Saheed Bhagat singh) ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और असहयोग आंदोलन के पीछे के कारणों का भी समर्थन किया और खुले तौर पर अँग्रेजी हुकुमत को चुनौती दी थी जब अंग्रेजो द्वारा प्रकाशित पुस्तकों को भगत सिंह (Bhagat Singh) ने जला डाला था जिसमे वो गाँधी जी के असहयोग आन्दोलन का समर्थन कर रहे थे उनकी किशोरावस्था के दौरान दो घटनाओं ने उन्हें देशभक्ति के लिए और भी मज़बूत बना दिया जिसमे पहली घटना 1919 में जलियांवाला बाग और दूसरी घटना 1921 में ननकाना साहिब में निहत्थे अकाली प्रदर्शनकारियों की हत्या थी।

जलियांवाला बाग की दशा इतनी ख़ौफ़नाक थी की वहाँ उन्हें भारतीयों की चीख़ने की आवाज़ महसुस होने लगी जिसके बाद उन्होंने भारतीयों के ख़ून से सनी मिट्टी उठाई और एक शीशी में एकत्र की और घर ले आये उस दिन वो एकदम शांत रहे और अपने गुस्से को पालने लगे और हर दिन उस मिट्टी की पूजा करने लगे और शपथ ली की अंग्रेजों की शाही हुकुमत को जड़ से उखाड़ देंगे और देश को आज़ादी दिला कर रहेँगे ।

चौरी चौरा घटना के बाद गांधी जी ने ”असहयोग आंदोलन” को वापस लेने का फैसला किया गाँधी जी के इस फैसले से भगत सिंह (Bhagat Singh) नाखुश थे, भगत सिंह (Bhagat Singh) ने गांधी जी की अहिंसक कार्रवाई से खुद को अलग कर लिया और युवा क्रांतिकारी आंदोलन में शामिल हो गए और इस प्रकार अंग्रेजो के खिलाफ हिंसक विद्रोह के सबसे प्रमुख व्यक्तित्व के रूप में एक क्रन्तिकारी ने जन्म लिया जिसने ब्रिटिश सरकार की जड़ें हिला दी ये वही समय था जब इस महान देश का क्रन्तिकारी दौर  बढ़ता चला गया भारत माँ की आज़ादी तक ।

ये साहस हे था जब अंग्रेज़ो ने लाठियों से मार-मार कर लाला लाजपत राय की हत्या कर दी, वो साइमन कमीशन का विरोध कर रहे थे, उनकी मृत्यु से सारा देश उत्तेजित हो उठा और चंद्रशेखर आजाद, भगतसिंह (Bhagat Singh), राजगुरु, सुखदेव और अन्य क्रांतिकारियों ने उनकी मौत का बदला लेने का फैसला किया । इन जांबाज देशभक्तों ने लाला लाजपत राय की मौत के ठीक एक महीने बाद अपनी प्रतिज्ञा पूरी कर ली और 17 दिसम्बर 1928 को ब्रिटिश पुलिस के अफसर सांडर्स को गोली से उड़ा दिया ।

‘’महान स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय की मौत के बदले सांडर्स की हत्या के मामले में ही राजगुरु, सुखदेव और भगतसिंह को फांसी की सजा सुनाई गई । ’’

‘’ साहसी लोग ही कठिन समय में निर्णय ले पाते क्यों की वे सक्षम होते है ऐसा करने में , जो की अन्य लोग नहीं ले पाते क्यूँकि वे उसके  परिणाम से डरते है, परिणाम किसी के बस में नहीं होता, इसलिए हमे कर्म करना चाहिए , परिणाम  चिंता नहीं करनी  चाहिए । ‘’

  1. स्वाभिमान : जिसने कभी झुकने नहीं दिया
  • भगत सिंह (Saheed Bhagat singh) चाहते तो माफ़ी माँग कर फाँसी से बच सकते थे लेकिन मातृभूमि के इस सच्चे सपूत को झुकना पसंद नहीं था लेकिन भगत सिंह (Bhagat Singh) का मानना था की ज़िन्दगी तो अपने दम पर जी जाती है, दुसरो के कंधों पर तो जनाजे उठा करते है
  • क्रांतिकारी भगत सिंह (Bhagat Singh) के विचार गाँधी जी से बिल्कुल अलग थे, भगत सिंह (Bhagat Singh) का कहना  था की अगर हमे आज़ाद होना है तो ईंट का जवाब पत्थर से देना होगा, वह  कहते थे की  शक्ति का दुरूपयोग हो तो वो हिंसा  बन जाती है और अगर शक्ति का प्रयोग किसी सही कार्य को करने के लिए हो तो वो न्याय का एक रूप बन जाता है उनके इसी स्वभाव ने उन्हें कभी झुकने नहीं दिया, अंग्रेजो के ज़ुल्म सहते रहे और मुस्कराते रहे।
  1. त्याग (बलिदान) क्यों ज़रूरी है : किसी लक्ष्य के लिए
Bhagat Singh (भगत सिंह), Rajguru (राजगुरु ), Sukhdev(सुखदेव)
Photograph of Bhagat Singh (भगत सिंह), Rajguru (राजगुरु ), Sukhdev(सुखदेव)

“लिख रहा हु मैं अंजाम, जिसका कल आगाज आएगा । मेरे लहू का हर एक कतरा, इंकलाब लाएगा|”

त्याग (बलिदान) क्यों ज़रूरी है : किसी लक्ष्य के लिए

  • भगत सिंह (Bhagat Singh) के त्याग को किसी मापदंड पर मापा नहीं जा सकता वो इतना बड़ा त्याग था जिसे करने के लिए एक प्रचंड इच्छा शक्ति की आवश्यकता होती है जो भगत सिंह (Saheed Bhagat singh), राजगुरु और सुखदेव द्वारा हमने देखी है।
  • उन्होंने कम उम्र में ही अपने देश के लिए अपने प्राण व अपना परिवार व अपनी युवावस्था की खुशियाँ को न्योछावर कर दी ताकि आज हम लोग चैन से जी सके और आज़ाद हवा में साँस ले सके।
  • उनकी शादी के लिए उनका परिवार सोच ही रहा था की भगत सिंह (Saheed Bhagat singh) ने शादी के लिए मना कर दिया और कहा अगर आजादी से पहले मैं शादी करूँ तो मेरी दुल्हन मौत होगी ।”
  • उनकी इसी विचारधारा ने उन्हें आज भी इतने वर्षो पश्चात भी हमारे दिल और दिमाग में ज़िंदा रखा है और एक प्रेणना का स्त्रोत बने हुए है ठीक उसी प्रकार आप भी किसी लक्ष्य को प्राप्त करना चाहते है तो आपको ऐसे त्याग और बलिदान की जरूरत है जो आपको आपके लक्ष्य के और भी करीब लेकर जाएगी ।

’क्या आप तैयार है त्याग और समर्पण के लिए अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए ?

  1. बहादुरी – भगत सिंह
Bhagat Singh inspiretome
Bhagat Singh (भगत सिंह)-एक सच्चे सेनानी का सच्चा समर्पण
  • भगत सिंह (Bhagat Singh) ने अंग्रेजों से कहा था कि “फांसी के बजाय उन्हें गोली मार देनी चाहिए” लेकिन अंग्रेजों ने इस पर विचार नहीं किया।
  • उन्होंने अपने अंतिम पत्र में इसका उल्लेख किया, भगत सिंह ने इस पत्र में लिखा, “चूंकि मुझे युद्ध के दौरान गिरफ्तार किया गया था इसलिए, मुझे फांसी की सजा नहीं दी जा सकती। मुझे तोप के मुंह में डाल दिया जाए।” यह उनकी बहादुरी और राष्ट्र के लिए भावना को दर्शाता है।
  • साथियों के साथ, भगत सिंह ने सेंट्रल असेंबली(दिल्ली) में बम फेंके, वे किसी को घायल नहीं करना चाहते। बम निम्न श्रेणी के विस्फोटक से बने थे ।
  • भगत सिंह ने जेल में 116 दिन का उपवास किया था, अंग्रेज़ो के यातनाए  सहते रहे, जल का एक बूँद भी उन्हें पीने को  नहीं मिला न अन्न का एक दाना उन्होंने ग्रहण किया, आश्चर्य की बात है कि इस दौरान वह अपना सारा काम नियमित रूप से करते थे, जैसे गाना, किताबें पढ़ना, हर दिन कोर्ट जाना आदि।
  • भगत सिंह ने एक शक्तिशाली नारा इंकलाब जिंदाबाद’ गढ़ा, जो भारत के सशस्त्र संघर्ष का नारा बन गया।

23 मार्च, 1931 को आधिकारिक समय से एक घंटे पहले उन्हें फांसी दे दी गई थी। कहा जाता है कि जब भगत सिंह को फांसी दी गई थी, तब वे मुस्कुरा रहे थे। वास्तव में, यह “ब्रिटिश साम्राज्यवाद को कम” करने के लिए निडरता के साथ किया गया था। कहा जाता है कि भगत सिंह की फांसी की निगरानी के लिए कोई भी मजिस्ट्रेट तैयार नहीं था। मूल मृत्यु वारंट की समय सीमा समाप्त होने के बाद, एक मानद न्यायाधीश ने निष्पादन आदेश पर हस्ताक्षर किए और उसका निरीक्षण किया।

जब उनकी मां जेल में उनसे मिलने आई थीं, तो भगत सिंह Saheed Bhagat singh जोर-जोर से हंस रहे थे। यह देखकर जेल अधिकारी हैरान रह गए कि यह व्यक्ति कैसा है जो मौत के इतने करीब होने के बावजूद खुलकर हंस रहा है

उनका कहना था की देश के जवान देश के लिए कुछ भी कर सकते है देश का हुलिया बदल सकते है और देश को आजाद भी करा सकते है|

भगत सिंह के इस विचार और सोच को हमे आगे लेकर बढ़ना है, इस दुनिया को युवाओ की जरूरत है एक सतर्क और सक्रिय युवा कुछ भी कर सकने की हिम्मत रखता हो निडरता से भरा हुआ युवा जिसके लिए कुछ भी नामुमकिन ना हो।

पहचानो खुद को अपने अंदर की कला को अपने जूनून को ।

मेहनत और कड़ी तपस्या से पायी हुई मंज़िल एक गहरे सुख का अनुभव कराती है, ऐसे मनुष्य दैवीय होते है जो अपने प्रकाश मई आभा से इस संसार को जगमगाये रखते है, और लोगो को सही राह दिखाते है ।

उठो जागो और आगे बढ़ो ।

भगत सिंह सिर्फ़ नाम नहीं एक विचार है एक राह है एक सफर है , जो  बताता है ज़िन्दगी में कैसे-कैसे मोड़ और पड़ाव आते है जो निर्धारित करते है, की हम कहा जायँगे यह आप पर निर्भर करता है की आप उसे कैसे जीवन में अपनाते है, जीवन की विषम परिस्थितियों में जो मजबूती से खड़ा रहता है वही घोर अँधेरे में आशा की किरण लाता  है ।

माना की विषम परिस्थितियों में चट्टान की तरह खड़ा रहना आसान नहीं परन्तु नामुमकिन भी नहीं, समझा जाये तो नामुमकिन जैसी कोई चीज़ ही नहीं है, अगर कुछ करने की ठान ली जाये तो कुछ भी मुश्किल या नामुमकिन नहीं है, मनुष्य को उसकी इच्छा शक्ति ही उसे महान बनाती है और प्रेरित करती है उसे कुछ कर गुजरने की ।

उम्मीद है आपको ये आर्टिकल पसंद आया होगा आशा करता हूँ। इसे पढ़ने के बाद आप भी जीवन में एक सकारात्मक परिवर्तन अपनाये और खुद के साथ-साथ दुसरो के जीवन में भी एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार करे व उन्हें प्रेरित करे ।

धन्यवाद ।

”जय हिन्द”

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11 Most Inspirational Quotes of Dr. A. P. J. Abdul Kalam

डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम (Dr. A. P. J. Abdul Kalam) जिन्होंने भारत के 11 वें राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया, वह एक उल्लेखनीय व्यक्ति थे जिन्होंने विज्ञान से लेकर राजनीति तक कई क्षेत्रों में अपनी अमिट छाप छोड़ी। उन्होंने मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की डिग्री ली।  ”द मिसाइल मैन ऑफ इंडिया” (The Missile Man of India) के रूप में प्रसिद्ध उनका लेखन, किताबें, व्याख्यान, विचार, विचार और जीवन पीढ़ियों के लिए एक मार्गदर्शक प्रकाश रहे हैं और आगे भी रहेंगे। विविध क्षेत्रों में विविध अनुभवों के साथ एक अत्यधिक जानकार व्यक्ति और एक कुशल लेखक भी थे।

ए. पी. जे. अब्दुल कलाम (Dr. A. P. J. Abdul Kalam) द्वारा लिखे गए कुछ उद्धरण (Quotes) जो आपको और हमे अपने जीवन के लक्ष्य की ओर प्रेरित करते है

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  1. “मनुष्य को जीवन में कठिनाइयों की आवश्यकता होती है क्योंकि सफलता का आनंद उठाने के लिए वे आवश्यक हैं।” –डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम

“Man needs difficulties in life because they are necessary to enjoy the success.”-Dr. A. P. J. Abdul Kalam

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 2.     “उत्कृष्टता एक निरंतर प्रक्रिया है और दुर्घटना नहीं है।” –डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम

“Excellence is a continuous process and not an accident.” –  Dr. A. P. J. Abdul Kalam

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3.     “सभी पक्षी बारिश के दौरान आश्रय पाते हैं। लेकिन ईगल बादलों के ऊपर उड़कर बारिश से बचता है।” –डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम

“All Birds find shelter during a rain. But Eagle avoids rain by flying above the Clouds.”-Dr. Abdul Kalam.

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4.     “अपनी पहली जीत के बाद आराम मत करो क्योंकि यदि आप दूसरे में असफल होते हैं, तो अधिक होंठ यह कहने के लिए इंतजार कर रहे हैं कि आपकी पहली जीत सिर्फ भाग्य थी।” –डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम

“Don’t take rest after your first victory because if you fail in second, more lips are waiting to say that your first victory was just luck.’’-Dr. Abdul Kalam.

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5.     “अगर मेरी परिभाषा पर्याप्त रूप से मजबूत है तो असफलता मुझे कभी नहीं पछाड़ेगी”। –डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम

“Failure will never overtake me if my definition to succeed is strong enough”-Dr. Abdul Kalam.

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6.     “सपना वह नहीं है जो आप सोते समय देखते हैं यह कुछ ऐसा है जो आपको सोने नहीं देता है।” –डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम

“Dream is not that which you see while sleeping it is something that does not let you sleep.”-Dr. Abdul Kalam.

7.     “किसी को हराना बहुत आसान है, लेकिन किसी को जीतना बहुत मुश्किल है” –डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम

“It is very easy to defeat someone, but it is very hard to win someone”-Dr. A. P. J. Abdul Kalam.

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8.     “अगर आप सूरज की तरह चमकना चाहते हैं, तो पहले सूरज की तरह जलें।” –डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम

‘‘If you want to shine like a sun, first burn like a sun.”- Dr. Abdul Kalam.

9.     ‘‘हमें हार नहीं माननी चाहिए और हमें समस्या को हमें हराने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।’’ –डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम

‘‘We should not give up and we should not allow the problem to defeat us’’-Dr. Abdul Kalam.

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 10.     अपने मिशन में सफल होने के लिए, आपके पास अपने लक्ष्य के लिए एकल-दिमाग वाली भक्ति होनी चाहिए।-डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम

‘‘To succeed in your mission, you must have single-minded devotion to your goal’’- Dr. A. P. J. Abdul Kalam.

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11.     जब तक आप अपनी नियत जगह पर नहीं पहुँचते, तब तक लड़ना बंद न करें – अर्थात, आप अद्वितीय जीवन में एक उद्देश्य रखें, लगातार ज्ञान प्राप्त करें, कड़ी मेहनत करें और महान जीवन का एहसास करने के लिए दृढ़ता रखें।-डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम

‘‘Never stop fighting until you arrive at your destined place – that is, the unique you. Have an aim in life, continuously acquire knowledge, work hard, and have perseverance to realise the great life’’- Dr. Abdul Kalam.

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